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News at a Glance

भारत में कौन मतदान कर सकता है



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भारत में मतदान प्रणाली

भारतीय संविधान उन सभी व्यक्तियों को मतदान का अधिकार प्रदान करता है जो देश के नागरिक हो और जिनकी आयु 18 साल से कम न हो। यह न्यूनतम आयु सीमा 28 मार्च 1989 से लागू हुई थी, इससे पहले मतदान करने की न्यूनतम आयु 21 साल थी। भारतीय संविधान पुरुष और महिला मतदाताओं के बीच भेद नहीं करता है और उन्हें समान अधिकार प्रदान करता है, इस प्रकार उनके वोट की बराबर कीमत होती हैं। इसी तरह, रंग, वर्ग, जाति इत्यादि के आधार पर कोई भेद नहीं किया जाता है। मतदान करने वाला वह व्यक्ति भारत का एक वास्तविक नागरिक होना चाहिए।

मतदान पंजीकरण की प्रक्रिया

चुनाव के समय एक मतदान केंद्र में आवंटित होने के लिए, 18 वर्ष से अधिक उम्र के नागरिक खुद को मतदाताओं के रूप में पंजीकृत करने और मतदाता पहचान पत्र बनवाने की आवश्यकता होती है। वे अपने निर्वाचन क्षेत्र के निर्वाचन पंजीकरण अधिकारी के पास प्रारुप -6 को भरकर जमा करके भी ऐसा कर सकते हैं। मतदाताओं को एक से अधिक स्थानों पर नामांकन करने की अनुमति नहीं है। इसके अलावा, मतदान अधिकार काम और निवास की वर्तमान जगह तक ही सीमित हैं। उदाहरण के लिए, यदि कोई व्यक्ति गुजरात का मूल निवासी है लेकिन मुंबई में काम कर रहा है, तो वह केवल मुंबई के उस निर्वाचन क्षेत्र में वोट डालने योग्य है।

अपराधियों को मतदान करने का अधिकार

दोषी अपराधियों और कैदियों को मतदाताओं के रूप में चुनाव में भाग लेने पर प्रतिबंध है। इसके साथ ही विक्षिप्त मानसिक स्थिति वाले व्यक्ति मतदान नहीं कर सकते हैं। जिसके अनुसार, विभिन्न राज्यों से गुटों द्वारा कैदियों के लिए मानव अधिकारों के लिए बहस की जा रही है। उनके मुताबिक, कैदी भी देश के नागरिक हैं और वह गणराज्य का हिस्सा हैं इसलिए वो चुनावों में समान भागीदारी के लायक हैं। हालांकि, इन सभी कारणों को अभी तक ज्यादा समर्थन नहीं मिला है।

अनिवासी भारतीय (एनआरआई)

मतदाता के रूप में अर्हता प्राप्त करने के लिए, व्यक्ति को विशेष निर्वाचन क्षेत्र में रहना चाहिए। इस प्रकार मतदान प्रक्रिया में भाग लेने से अनिवासी भारतीयों को निषिद्ध है। एक मामले को छोड़कर यदि एनआरआई भारत सरकार के तहत नियोजित एक भारतीय नागरिक होता है और वर्तमान में विदेश में नियुक्त किया जाता है, तो वह मतदाता के रूप में पंजीकृत हो सकता है।

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का उपयोग (ईवीएम)

1981 में केरल के एक छोटे जिले में चुनाव आयोग ने ईवीएम से वोट डलवाए थे। मशीनों से वोट डालने के लिए केवल एक ही बटन दबाने की आवश्यकता होती है, जो मतदान करने के लिए किए गए समय और परिणामों को संसाधित करने और घोषित करने के लिए आवश्यक समय से दो गुना कम करता है। भारत में इस चुनावी तरीके के उपयोग से चुनाव में बड़ा परिवर्तन आया है। हालांकि, जैसे विभिन्न जनहित याचिका कथन (पीआईएल) ने तर्क दिया है कि मशीनें टैपर-स्पष्ट नहीं कर रही हैं और इसमें आसानी से छेड़छाड़ की जा सकती हैं।

इन रुकावटों को दूर करने के लिए, वोटर वैरिफाइड पेपर ऑडिट ट्रेल (वीवीपीएटी) प्रणाली अपनाई गई है, जो वोट के प्रिंटआउट को सिर्फ मतदाता द्वारा डाला जाता है, यह पुष्टि करते हुए कि वोट पार्टी के पक्ष में गिना गया था। किसी भी संदेह का मामला उठने पर पेपर ट्रेल का उपयोग मशीनों के माध्यम से प्राप्त डेटा को सत्यापित करने के लिए किया जा सकता है।
Last Updated on September 25, 2018