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News at a Glance

भारतीय संसद (एमपी) के आंग्ल भारतीय सदस्य



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आंग्ल भारतीय सांसदों के बारे में

भारतीय संसद देश का सर्वोच्च विधायी निकाय है, जो देश के विभिन्न वर्गों का प्रतिनिधि है। दूसरे शब्दों में, जो संसद में विभिन्न सीटों के लिए निर्वाचित किए जाते हैं, वे विशिष्ट भौगोलिक निर्वाचन क्षेत्रों के मामले साथ ही साथ आबादी के विभिन्न वर्गों जैसे अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य का प्रतिनिधित्व करते हैं। एक ऐसा ही समुदाय, जिसे भारत की संसद द्वारा प्रतिनिधित्व किया जाता है, आंग्ल भारतीय समुदाय है।

भारतीय संविधान के अनुसार, आंग्ल भारतीय समुदाय को एक व्यक्ति के रूप में परिभाषित किया गया है, "एक व्यक्ति जिसके पिता या पुरुष पीढ़ी में अन्य कोई मूल पुरुष यूरोपीय है या थे; लेकिन भारत के राज्यक्षेत्र के भीतर अधिवासित है और जो ऐसे राज्य क्षेत्र में ऐसे माता-पिता से जन्मा है जो वहाँ साधारणतया निवासी रहे हैं और केवल अस्थायी प्रयोजनों के लिए वास नहीं कर रहे हैं।“

यह स्पष्ट है कि भारत की जनसांख्यिकीय संरचना के अंतर्गत, आंग्ल भारतीय समुदाय की आबादी अल्पसंख्यक है और देश में एक विशेष स्थिति रखती है। इनकी आबादी कम होने के कारण, समुदाय का कई बार संसद के दोनों सदन अर्थात् लोकसभा या निम्न सदन और राज्यसभा या उच्च सदन में पर्याप्त रूप से प्रतिनिधित्व नहीं हो पाता है।

चूँकि भारत एक द्विसदनीय विधायिका का पालन करता है जहाँ लोकसभा के सदस्य प्रत्यक्ष रूप से देश की जनता द्वारा चुने जाते हैं, ऐसा पाया गया है कि अधिकतर आंग्ल भारतीय समुदाय के सदस्य निर्वाचित नहीं किए जाते हैं। ऐसे मामलों में, जब यह महसूस होता है कि समुदाय का प्रतिनिधित्व नहीं किया गया है तो भारत के राष्ट्रपति लोकसभा में सांसदों के रूप में इस समुदाय के दो सदस्यों को नियुक्त करते हैं। दूसरे शब्दों में, लोकसभा के सदस्यों की अधिकतम संख्या 552 होती हैं, जिसमें से 550 सदस्य चुने जाते हैं और भारत के राष्ट्रपति द्वारा दो से अधिक सदस्यों को नामित नहीं किया जाता है। सदन की वर्तमान संख्या में 545 सदस्य शामिल हैं। इसलिए, सोलहवीं लोकसभा अवधि में होने वाले आगामी चुनावों में, भारत के 543 निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव होंगे, जबकि दो सीटें आंग्ल भारतीय समुदाय को नियुक्ति के लिए आरक्षित हैं।

आंग्ल भारतीय की सांसदों में भूमिका

संसद में आंग्ल भारतीय सदस्यों के संसद के नामांकन के लिए आधारभूत आधार 'लोक सभा' या लोगों का सदन में नामांकन के लिए आधारभूत आधार यह है कि इन सदस्यों को संसद में उनके समुदाय की मामलों को प्रतिनिधित्व करना है। हमें इस संबंध में ध्यान रखना चाहिए, कि अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजातियों और महिलाओं जैसे अल्पसंख्यक वर्गों के लिए भारतीय संविधान द्वारा विशिष्ट निर्वाचन क्षेत्रों के आरक्षण की गारंटी दी गई है। परन्तु अन्य अल्पसंख्यक वर्गों में सबसे प्रमुख आंग्ल भारतीय समुदाय है, जिसमें कोई आरक्षण आश्वस्त नहीं है। भारत सरकार की संसदीय प्रणाली में, यह अनिवार्य है कि इस विशेष समुदाय के दोनों सदस्य पूरे समुदाय के विचारों और समस्याओं को सुनें। इसलिए, मुख्य रूप से आंग्ल भारतीय सांसदों की भूमिका समुदाय के संरक्षण के लिए और भारत के क्षेत्राधिकार के अंतर्गत इसकी जोशपूर्ण उपस्थिति होनी चाहिए।

आंग्ल भारतीय सांसदों के अधिकार

एक बार भारतीय संसद में मनोनीत होने के पश्चात, दो आंग्ल भारतीय सांसद सदन के अन्य सांसदों के बराबर अपने अधिकारों और पदवी का उपयोग कर सकते हैं। आंग्ल भारतीय सांसदों द्वारा प्रयोग किए जाने वाले कुछ अधिकार ये हैं:
  • कानून बनाने के अधिकारः सांसदों का सबसे महत्वपूर्ण कार्य कानून बनाना है। चूंकि संसद देश का सर्वोच्च विधायी निकाय है, इसलिए दोनों सदनों की संसद के सदस्य संघ सूची और संविधान की समवर्ती सूची के अंतर्गत आने वाले किसी भी मामले पर कानून बना सकते हैं। जब संसद में एक साधारण विधेयक आरंभ किया जाता है, तो संसद के दोनों सदनों को कानून बनने के लिए विधेयक पारित करना पड़ेगा।
    सांसद कुछ विशेष परिस्थितियों में राज्य सूची के अंतर्गत आने वाले मामलों में भी कानून बना सकते हैं जैसे कि:
    (क) भारतीय संविधान के अनुच्छेद 356 के तहत एक आपातकाल जारी किया जाता है,

    (ख) राज्यसभा द्वारा विशेष बहुमत के साथ एक प्रस्ताव पारित किया जाता है, जिसके चलते राष्ट्रीय हित में राज्य के लिए कानून बनाने के लिए कहा जाता है, जो एक वर्ष के लिए वैध रह सकता है,

    (ग) दो या तीन राज्यों द्वारा एक प्रस्ताव, संसद पर राज्य सूची के कुछ मामलों में कानून बनाने के लिए आग्रह करता है, और

    (घ) यदि कोई अंतरराष्ट्रीय संधि या एग्रीमेंट क्रियान्वित किया जाना है।

  • प्रबंधक पर नियंत्रण: चूँकि भारत सरकार के संसदीय रूप का पालन करता है, इसलिए कार्यकरी प्रत्यक्ष रूप से संसद के लिए जिम्मेदार होता है। दूसरे शब्दों में, सांसद कार्यकारी प्रतिदिन की गतिविधियों पर नजर रख सकता है, उनसे प्रश्न कर सकते हैं, उन्हें बेनकाब कर सकते हैं तथा किसी भी अविश्वास के वोट को पारित करके सत्ता से सत्ताधारी कैबिनेट को हटा सकते हैं। प्रशासन-संबंधी किसी भी अहम त्रुटि को सांसदों द्वारा स्थगित प्रस्ताव, कटौती प्रस्ताव, संवेदना प्रस्ताव के द्वारा सामने लाया जा सकता है। भारतीय संसद में सांसदों को व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से रखा जाता है और मंत्रियों की एक परिषद तब तक सत्ता में बनी हुई है जब तक उसे लोकसभा का विश्वास प्राप्त है। यह निम्न सदन का एक महत्वपूर्ण कार्य है।
  • वित्तीय अधिकार: अन्य सांसदों के समान आंग्ल भारतीय सांसदों के सबसे प्रमुख कार्यों में से एक उनके वित्तीय अधिकार हैं। वार्षिक बजट की प्रस्तुति के माध्यम से, दो स्थायी समितियों की उपस्थिति और धन बिलों पर कानून बनाना, संसद को प्रबंधक के वित्तीय विचार-विमर्श पर सर्वोच्च अधिकार प्राप्त है।
  • न्यायिक अधिकार: सांसद अपने पद से राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और अन्य उच्च संघीय अधिकारियों पर महाभियोग चला सकते हैं। सांसद भारतीय संविधान के विरुद्ध कार्य करने वाले अपने सदस्यों के साथ-साथ गैर-सदस्यों को भी दंडित करने के लिए कुछ दंडात्मक अधिकारों का प्रयोग कर सकते हैं।
  • शक्तियों में संशोधन: दोनों सदनों के सांसद भारतीय संविधान में संशोधन कर सकते हैं।
  • चुनावी अधिकारः सांसद कुछ विशेष चुनावी अधिकारों का प्रयोग करते हैं जैसे कि देश के राष्ट्रपति और उपराष्ट्रपति का चुनाव करना।

योग्यता मानदंड

संसद में नामांकित होने के लिए आंग्ल भारतीय समुदाय के सदस्यों की योग्यताएँ हैं:
  • वह भारत का नागरिक होना चाहिए।
  • वह 25 साल से कम का नहीं होना चाहिए।
  • उसे भारत सरकार या किसी अन्य राज्य सरकार से लाभ का कोई भी पद धारण नहीं करना चाहिए।
  • वह मानसिक रोगी नहीं होना चाहिए।

आंग्ल भारतीय सांसदों का वेतन

सन् 2010 के संसद विधेयक के सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन के अनुसार, संसद सदस्य का वेतन 2,000 रुपये के भत्ते के साथ 50,000 रुपये है।

आंग्ल भारतीय सांसदों के लिए सुविधाएँ

सन् 2010 के संसद विधेयक के सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन के अनुसार, सांसदों को अन्य सुविधाओं जैसे कि एक निश्चित संख्या में श्रेणियाँ, मुफ्त बिजली का उपयोग, मुफ्त फोन बिलों और अन्य प्रतिपूर्तियों के अलावा आवासीय और यात्रा भत्ते दिए जाते हैं।

चयन प्रक्रिया

एक आम चुनाव के पश्चात जिसमें विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों के सांसदों का चुनाव किया जाता है, यदि राष्ट्रपति को लगता है कि आंग्ल भारतीय समुदाय के पर्याप्त सदस्य संसद में नहीं चुने गए हैं, तो राष्ट्रपति लोकसभा के इस समुदाय में दो से अधिक सदस्यों को नामित नहीं करते हैं।

आंग्ल भारतीय सांसदों के कार्यकाल की अवधि

लोकसभा का कार्यकाल पाँच वर्ष का है। अन्य सांसदों के समान, लोकसभा के अगले कार्यकाल का निर्णय करने के लिए नये चुनाव होने से पहले आंग्ल भारतीय सांसद पाँच वर्ष में अपना पद खाली कर देते हैं। सांसदों के सेवानिवृत्ति की कोई अवधि नहीं है। आंग्ल भारतीय समुदाय को उसी सांसद के लगातार संसदीय सत्रों में फिर से नामित करने की अनुमति होती है।


पेंशन

सन् 2010 के संसद विधेयक के सदस्यों के वेतन, भत्ते और पेंशन के अनुसार, सांसद 20,000 रुपये की मासिक पेंशन और 1500 रुपये के अतिरिक्त भत्ते का अधिकारी है।

निवास

आंग्ल भारतीय सांसदों को नई दिल्ली में निः शुक्ल आवासीय क्वार्टर उपलब्ध कराए जाते हैं।

रोचक तथ्य

  • 15वें लोकसभा सत्र में आंग्ल भारतीय सदस्य डॉ चार्ल्स डायस थे। वह पेशे से एक सिविल सेवक हैं।
  • लोकसभा में नामित होने वाली आंग्ल भारतीय सांसदों की बहुत कम महिलाएँ में से एक छत्तीसगढ़ से इंग्रिड मैकलिओड है। वह 15वीं लोकसभा में संसद सदस्य बनीं थीं।

सोलहवीं लोकसभा में नामित सदस्य

क्रम संख्यासदस्य का नामपार्टी का नामराज्य
1बेकर्स, श्री जार्जभारतीय जनता पार्टीपश्चिम बंगाल
2हे, प्रोफेसर रिचर्डभारतीय जनता पार्टीकेरल
Last Updated on October 18, 2018