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लोकसभा चुनाव में कितनी सफल साबित होगी पश्चिम बंगाल में पीएम मोदी की रणनीति?

Posted by Admin on February 8, 2019 | Comment

 PM Modi

लोकसभा चुनाव के मद्देनजर पूरे देश में एक सियासी माहौल बना हुआ है। वैसे तो देश के हर छोटे-बड़े राज्य की राजनीति में कई बनते बिगड़ते समीकरण नजर आ रहे हैं लेकिन मौजूदा समय में जो राज्य सबसे खास नजर आता है वो है पश्चिम बंगाल। वैसे तो सभी की नजरें लोकसभा की सबसे ज्यादा 80 सीटों वाले राज्य यूपी पर टिकी हैं लेकिन बीते कुछ दिनों से पश्चिम बंगाल की सियासत भी अपने चरम पर है। ये लड़ाई कोई एक-दो सीटों की नहीं है बल्कि पूरी सत्ता पाने की है। इस लड़ाई में एक तरफ है सूबे की मुखिया ममता बनर्जी तो दूसरी तरफ हैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी। भाजपा बड़े दिलचस्प ढंग से पश्चिम बगांल में अपनी योजना को अंजाम देना चाहती है। पार्टी को पता है कि ममता बनर्जी एक कद्दावर नेता हैं और राष्ट्रीय स्तर की राजनीति में सिरमौर की भूमिका निभाने का सपना उनके दिल में भी है। ऐसे में ये लड़ाई आसान नहीं है। आबादी की बुनावट और सियासी माहौल की खासियत के कारण पश्चिम बंगाल भाजपा के लिए चुनाव में पासा पलट देने वाला राज्य साबित हो सकता है।

मोदी की रणनीति से भाजपा को हो सकता है फायदा

टीएमसी शासित पश्चिम बंगाल में लोकसभा की 42 सीटें हैं। भाजपा चाहती है कि पश्चिम बंगाल की कम से कम 50 फीसदी सीटें उसकी झोली में आ जाएं। हालांकि भाजपा ने अभी तक पश्चिम बंगाल में 23 सीटें जीतने का लक्ष्य रखा है। भाजपा ने एक खास रणनीति के तहत अपना ध्यान पश्चिम बंगाल की तरफ लगाया है। भाजपा को अंदरुनी तौर पर ऐसा लग रहा है कि उत्तर और मध्य भारत में पार्टी का चुनावी प्रदर्शन इस बार 2014 की ऊंचाई को नहीं छू पाएगा। भाजपा ने 2014 में अकेले यूपी में अपने सहयोगी दलों के साथ लोकसभा की 80 में से 73 सीटों और मध्यप्रदेश, राजस्थान व गुजरात की कुल 80 में से 78 सीटों पर जीत हासिल की थीं। 2018 के विधानसभा चुनाव में हिन्दीपट्टी के तीन बड़े राज्यों में भाजपा की हार के बाद पार्टी 2019 का फाइनल मैच जीतने में कोई भी कसर छोड़ना नहीं चाहती। इसी वजह से भाजपा बंगाल में लगातार वोटों के ध्रुवीकरकण की कोशिश कर रही है। अगर बंगाल में वोटों का ध्रुवीकरण धार्मिक आधार पर होता है तो भाजपा को इसका सीधा सियासी फायदा मिलेगा। हालांकि मोदी की यह रणनीति कितनी सफल साबित होगी ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।

राज्य का सियासी माहौल

भारत के पूर्वी तट के राज्य, आंध्रप्रदेश, ओडिशा, तमिलनाडु, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में लोकसभा की कुल 543 सीटों में से 144 सीटें हैं। 2014 में मोदी लहर के बावजूद भाजपा यहां पर अच्छा प्रर्दशन नहीं कर पाई थी। भाजपा पश्चिम बंगाल में दशकों तक कुछ खास असर नहीं दिखा पाई, इक्का-दुक्का ठिकानों पर उसकी धाक जरूर कायम हुई, लेकिन फिर इस स्थिति से आगे बढ़कर अब भाजपा पश्चिम बंगाल में मुख्य विपक्षी के रूप में उभर कर आई है। भाजपा के हिमायती वोटरों की तादाद बढ़ रही है। इसके अलावा राज्य में किसी वक्त प्रभावशाली रही सीपीआई (एम) और कांग्रेस सरीखी पार्टियों को भाजपा अपने प्रभाव से किनारे कर चुकी है। पश्चिम बंगाल में प्रधानमंत्री मोदी की रैली में उमड़ी भीड़ को देखकर लगा कि पश्चिम बंगाल में भाजपा लोगों के दिलों में जगह बना रही है, उसके कदम मजबूती से जम गए हैं। रैली में आए लोगों ने पुरजोर आवाज में मोदी का समर्थन किया और बाद में ममता बनर्जी की जो क्रोध भरी प्रतिक्रिया सामने आयी, उससे साफ जाहिर था कि मोदी का तीर एकदम निशाने पर बैठा है। लेकिन भाजपा की मुश्किल यह है कि पार्टी में अब भी भीड़ को अपनी तरफ खींचने की ताकत सिर्फ एक ही व्यक्ति (मोदी) के पास सिमटी हुई है। हालांकि पीएम मोदी की रैली में आई भीड़ वोटों में कितनी तब्दील हो पाएगी इसके बारे में साफ तौर पर कुछ भी कहा नहीं जा सकता। राज्य में मोदी की बढ़ती लोकप्रियता के आगे हम ममता बनर्जी की सियासी मजबूती को नकार नहीं सकते। राज्य में भाजपा का वर्चस्व बढ़ रहा है लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि टीएमसी कहीं से कमजोर है यानि भाजपा के लिए चुनौती यहां भी कम नहीं है।

भाजपा को मटुआ समुदाय से है विशेष उम्मीदें

पश्चिम बंगाल में भाजपा को मटुआ समुदाय से काफी उम्मीदें है। राज्य में मटुआ समुदाय के लोगों की आबादी 3 करोड़ के आस-पास है और अपने संख्या बल के कारण ये समुदाय बंगाल की चुनावी राजनीति में खास अहमियत रखता है।

सूबे में पैर जमाने की कोशिश कर रही भाजपा के लिए मटुआ समुदाय विशेष रूप से महत्वपूर्ण है। मटुआ समुदाय के जो लोग 1971 के बाद से भारत में है। उन्हें साल 2003 के नागरिकता संशोधन अधिनियम में ‘अवैध घुसपैठिया’ करार दिया गया है। इन्हें पूर्ण नागरिकता मिलनी शेष है और ऐसे लोगों को संदिग्ध मतदाता की श्रेणी में रखा गया है। मटुआ लोगों की पूर्ण नागरिकता की मांग भाजपा के नागरिकता संशोधन विधेयक में है। मोदी ने पूर्ण नागरिकता के मामले को उठाते हुए तृणमूल कांग्रेस से चुनौती के स्वर में नागरिकता संशोधन विधेयक, 2019 को समर्थन देने को भी कहा है। अब यह समझना ज्यादा मुश्किल नहीं है कि भाजपा एक मजबूत वोटबैंक वाले समुदाय के महत्वपूर्ण मुद्दे का समर्थन करके और उनका विश्वास जीत कर सत्ता में आना चाहती है।