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भारत में लेफ्टिनेंट गवर्नर की शक्तियां

Posted by Admin on October 29, 2018 | Comment

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भारत में लेफ्टिनेंट गवर्नर की शक्तियां

लेफ्टिनेंट गवर्नर एक महत्वपूर्ण संवैधानिक भूमिका निभाते हैं। भारतीय संविधान ने गवर्नर और लेफ्टिनेंट गवर्नर को भारत के राष्ट्रपति के समान शक्तियां और कार्य प्रदान किये हैं। भारत में लेफ्टिनेंट गवर्नर का पद दिल्ली (जो एक राज्य भी है), अंडमान और निकोबार द्वीप समूह एवं पुडुचेरी के केंद्र शासित प्रदेशों में मौजूद है।

लेफ्टिनेंट गवर्नर की भूमिका और कार्य

गवर्नर की तरह, लेफ्टिनेंट गवर्नर केंद्र शासित प्रदेश के नाम मात्र के मुखिया के रूप में कार्य करता है जबकि वास्तविक शक्ति का प्रयोग मुख्यमंत्री और उसके मंत्रिमंडल द्वारा किया जाता है।

भारत के संविधान के लेख 239 और 239एए में, लेफ्टिनेंट गवर्नर के कार्यों, शक्तियों और कर्तव्यों को स्पष्ट रूप से परिभाषित किया गया है। वे राष्ट्रपति के प्रतिनिधि होते हैं और मंत्रिपरिषद की सहायता और सिफारिश पर कार्य करते हैं।

जैसे अनुच्छेद 239 बी के प्रावधान राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के संबंध में लागू होते हैं, वैसे ही वे अंडमान और निकोबार द्वीप समूह और पुडुचेरी के संबंध में भी लागू होते हैं।

दिल्ली में लेफ्टिनेंट गवर्नर की भूमिका

दिल्ली अधिनियम, 1991 की जीएनसीटी (राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र की सरकार) की धारा 41 यह स्पष्ट करती है कि लेफ्टिनेंट गवर्नर विधानसभा को प्रदत्त शक्तियों की सीमा के बाहर आने वाले मामलों के दौरान अपने विवेकाधिकार में कार्य करेंगे।

यदि लेफ्टिनेंट गवर्नर को किसी कानून के तहत अपने विवेकाधिकार में कार्य करने की जरूरत पड़ती है तो उस मामले में उनका निर्णय अंतिम होगा। पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि के मामलों के सम्बन्ध में लेफ्टिनेंट गवर्नर राष्ट्रपति द्वारा उन्हें दिए गए अधिकारों का प्रयोग करते हैं। वह दिल्ली के पुलिस आयुक्त औरदिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) के उपाध्यक्ष, जिनके पास स्वतंत्र प्रशासनिक सेटअप होते हैं, की मदद से अपने अधिकार का प्रयोग करते हैं।

लेफ्टिनेंट गवर्नर डीडीए के कार्यकारी अध्यक्ष होते हैं, हालांकि वह दिल्ली में लागू विभिन्न अधिनियमों / नियमों / विनियमों के तहत अपील सम्बन्धी प्राधिकरण के माध्यम से अपने कार्यकारी कार्यों का प्रयोग करते हैं।

लेफ्टिनेंट गवर्नर और उनके मंत्रियों के बीच मतभेद के मामले में, लेफ्टिनेंट गवर्नर इसे निर्णय के लिए राष्ट्रपति के पास भेज सकते हैं और इस पर राष्ट्रपति द्वारा दिए निर्णय के अनुसार कार्य कर सकते हैं।

लेफ्टिनेंट गवर्नर का पद पहली बार दिल्ली प्रशासन अधिनियम, 1966 के प्रभाव में आने के बाद सितंबर 1966 में स्थापित किया गया था।

विधानसभा के प्रत्येक चुनाव के बाद पहले सत्र के शुरू होने पर और प्रत्येक वर्ष के पहले सत्र की शुरुआत में लेफ्टिनेंट गवर्नर सदन को संबोधित करते हैं।

लेफ्टिनेंट गवर्नर की विवेकाधीन शक्तियां

लेफ्टिनेंट गवर्नर कुछ विशेष स्थितियों में अपनी विवेकाधीन शक्तियों का उपयोग करते हैं। विधानसभा चुनावों में यदि कोई पार्टी बहुमत हासिल नहीं करती है, तो लेफ्टिनेंट गवर्नर के पास यह अधिकार होता है कि वह सबसे बड़ी पार्टी के नेता अथवा दो या अधिक पार्टियों के चुने हुए नेता से सरकार बनाने के लिए कहें। ऐसे मामले में, लेफ्टिनेंट गवर्नर उस नेता को मुख्यमंत्री के रूप में नियुक्त करते हैं। यदि अनुचित प्रशासन के कारण, राज्य तंत्र ध्वस्त हो जाता है तो लेफ्टिनेंट गवर्नर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की सिफारिश कर सकते हैं।

राष्ट्रपति शासन के तहत, लेफ्टिनेंट गवर्नर सरकार के पूर्ण कार्यकारी प्रमुख बन जाते हैं और उनके पास सलाहकारों के समूह, जो मंत्रिपरिषद के रूप में कार्य करता है, को नियुक्त करने की शक्ति होती है। राष्ट्रपति शासन की अवधि भी लेफ्टिनेंट गवर्नर के विवेकाधिकार के अधीन होती है।