Home » Political-Corner  » भारतीय राजनीतिक दल और उनकी विचारधाराएं

भारतीय राजनीतिक दल और उनकी विचारधाराएं

Posted by Admin on October 30, 2018 | Comment

political-parties-and-their-ideologies-in-india

भारतीय राजनीतिक दल और उनकी विचारधाराएं

भारत में राजनीतिक दलों में तेजी से हो रही वृद्धि को स्पष्ट करने वाला एकमात्र कारक विचारधारा में अंतर है। हालांकि उनमें से कुछ दल उदारवादी विचारधारा के समर्थक हैं,तोकुछ पूंजीवाद के विरोधी हैं। हिंदू राष्ट्रवाद द्वारा शपथ ग्रहण करने वाले कुछ राजनीतिक दलों के साथ सामाजिक क्षेत्र में भी वैचारिक मतभेद शामिल हैं और शेष दल प्रगतिशील पश्चिमीकरण के साथ सम्पूर्ण रूप से संतुष्ट प्रतीत होते हैं। यह विचारधाराओं और उनके पेशेवरों की विविधता है जो भारतीय राजनीति को अभी भी एक कठिन और दिलचस्प अध्ययन का मामला बनाती है।

भारत में कम्युनिस्ट पार्टियां

कम्युनिस्ट पार्टियां अपनी ‘एंटी-बिजनेस’ विचारधारा के लिए जानी जाती हैं। बारहमासी सब्सिडी, अल्पसंख्यक तुष्टीकरण और मानव अधिकारों के संरक्षण के समर्थक, वामपंथी दलों को2014 के आम चुनावों के बाद से अपना अस्तित्व बनाए रखने के लिए संकटों का सामना करना पड़ रहा है।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (सीपीआई) को अगुआकार कहा जा सकता है जिसने अपनी राजनीतिक ताकत प्रदर्शित करने के लिए बहुत सारे आंदोलन किए। त्रिपुरा, तेलंगाना और केरल में स्थानीय राजाओंके खिलाफ सशस्त्र संघर्ष से लगाकर मणिपुर में कृषि संघर्ष तक,पार्टी सामाजिक आंदोलनों में हमेशा सबसे आगे रही है। भूमि सुधार और व्यापार संघ आंदोलन सीपीआई की राजनीतिक विचारधारा को खुलकर दर्शाते हैं।

भारतीय कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) (सीपीआई-एम) खुद को “भारत के मजदूर वर्ग का क्रांतिकारी दल” कहती है। इसकी राजनीतिक विचारधारा समाजवाद, साम्यवाद और “मजदूर वर्ग के निरंकुश राज्य” की स्थापना पर केंद्रित है। इस पार्टी की गतिविधियां मार्क्स और लेनिन के सिद्धांतों पर आधारित हैं। सीपीआई-एम का घोषित उद्देश्य, जनता की मुक्ति और “मनुष्य द्वारा मनुष्य के शोषण” को समाप्त करने का एक तरीका खोजना है। पार्टी अब त्रिपुरा और केरल जैसे राज्यों में लगभग केंद्रित है।

कम्युनिस्ट परिवार के अधीन आने के बावजूद, ऑल इंडिया फार्वर्ड ब्लाक (एआईएफबी) अन्य वामपंथी दलों से अलग है। सीपीआई और सीपीआई-एम के विपरीत, एआईएफबी एक ऐसा वामपंथी राजनीतिक दल है जो मार्क्सवाद या लेनिनवाद के नियमों का पालन नहीं करता है। दल समाजवाद की जोरदार वकालत करता है जिसे सुभाष चंद्र बोस द्वारा परिभाषित और स्पष्ट किया गया है।

कांग्रेस पार्टी और सामाजिक उदारवाद

कांग्रेस बिना किसी तनाव के कम से कम पिछले 49 सालों से भारत की एक सत्तारूढ़ पार्टी रही है। भारतीय राजनीति के क्षेत्र में इस प्रमुख पार्टी ने 10 बार सरकार बनाई, 6 बार बहुमत हासिल किया और चार बार गठबंधन बनाया।

कांग्रेस पार्टी को इसके सामाजिक उदारवादी दृष्टिकोण के लिए, आम तौर पर राजनीतिक वर्णक्रम की केंद्र-वाम स्थिति पर रखा जाता है। यह समाज के सभी वर्गों के उत्थान के लिए गांधीवादी सिद्धांत का पालन करती है। कई अन्य समकालीन दलों के विपरीत, कांग्रेस उदारवादी राष्ट्रवाद का समर्थन करती है, जिसे समानता, स्वतंत्रता और अधिकारों को सम्मिलित करने वाला एक अधिक सहिष्णु राष्ट्रवाद के रूप में भी संदर्भित किया जा सकता है।

दल की समाजवादी प्रवृत्तियों और इसकी सरकार द्वारा बनाई गई प्रतिबंधात्मक आर्थिक नीतियों को अक्सर भारतीय अर्थव्यवस्था को नीचे ले जाने के लिए दोषी ठहराया गया है। पार्टी की आर्थिक नीतियों में एक महत्वपूर्ण विरोधाभास है। एक तरफ,जहाँयह मुक्त बाजार नीतियों का समर्थन करती हैऔर वहीं दूसरी तरफ अर्थव्यवस्था को उदार बनाने की बात आने पर यह ‘वेट एंड वाच’ दृष्टिकोण को अपनाती है। इन सभी के बावजूद, पार्टी को विनियमन, उदारीकरण और निजीकरण नीतियों को शुरू करने का श्रेय दिया जाता है।

भाजपा और दक्षिणपंथी राजनीति

निस्संदेह भाजपानेपिछले तीन या चार दशकों में अच्छा प्रदर्शन किया है। राजनीति की मुख्यधारा में बहुत ही धीमी गति से प्रवेश करने के बाद, संसद में प्रतिनिधित्व के संदर्भ में भारत की सबसे बड़ी राजनीतिक पार्टी बनने से पहले पार्टी ने धीरे-धीरे पहचान की सीढ़ी पर अपने कदम आगे बढ़ाए हैं।

भारतीय जनसंघ से अपनी उत्पत्ति के कारण, भाजपा हिन्दू राष्ट्रवादी समूह – राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) की सैद्धान्तिक और संगठनात्मक विचारधारा से संबंध रखती है। राम जन्मभूमि आंदोलन से लेकर सुशासन के लिए समान नागरिक संहिता तक, बेहतर दृश्यता हासिल करने के लिए पार्टी बुद्धिमानी से राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर बात कर रही है।

“एकात्म मानववाद” भाजपा की कथित विचारधारा है। इस विचारधारा को पहली बार 1965 में दीनदयाल उपाध्याय द्वारा सूत्रबद्ध किया गया था। पार्टी सामाजिक रूढ़िवादिता की एक मजबूत समर्थक है और राष्ट्रवादी सिद्धांतों के आधार पर विदेशी नीति का पालन करने में विश्वास रखती है। इससे पहले, पार्टी ने अल्पसंख्यक तुष्टीकरण, छद्म धर्मनिरपेक्षता और कश्मीर में अनुच्छेद 370 पर फिर से ध्यान देने की आवश्यकता के मुद्दे को उठाकर मजबूत विपक्ष की भूमिका निभाई है।

हाल ही में, भाजपा और इसके गठबंधन सहयोगियों ने मुख्य रूप से नव-उदार आर्थिक नीति पर अपना ध्यान केंद्रित किया है। कई लोग मानते हैं कि भाजपा की दक्षिणपंथी सोच और व्यपार समर्थक पक्ष को समय की आवश्यकता है।

अलगाववादी राजनीतिक दल

सभी दलों के हुर्रियत सम्मेलन (एपीएचसी) को शुरू में कश्मीर में 26 राजनीतिक, सामाजिक और धार्मिक संगठनों के गठबंधन के रूप में गठित किया गया था, ताकि वे “आत्मनिर्भरता का अधिकार” प्राप्त कर सकें।

कश्मीर में, जम्मू कश्मीर डेमोक्रेटिक लिबरेशन पार्टी (जेकेडीएलपी) के अलावा, गठबंधन में अन्य अलगाववादी राजनीतिक पार्टियां- यासीन मलिक की जम्मू-कश्मीर लिबरेशन फ्रंट (जेकेएलएफ), शेख याकूब की जम्मू-कश्मीर पीपुल्स लीग (जेकेपीएल) और शब्बीर शाह का पीपुल्स डेमोक्रेटिक फ्रंट (पीडीएफ) भी शामिल थीं।

हालांकि पीडीएफ वर्ष 2008 के विधानसभा चुनावों में एक सीट हासिल करने में कामयाब रही थी, लेकिन अलगाववादी राजनीतिक दलों का सामान्य प्रभाव चुनाव के दौरान स्पष्ट नहीं हुआ है। एपीएचसी के चेयरमैन सैयद अली शाह गिलानी, सबसे लोकप्रिय अलगाववादी नेता हैं जिनकी जम्मू-कश्मीर की आजादी से संबंधित चरमपंथी विचारधारा को मिश्रित प्रतिक्रियाएं प्राप्त हुई हैं।

क्षेत्रीय संरचनाएं

सीपीआई और सीपीआई-एम के अलावा, वर्ष 2009 में कुछ क्षेत्रीय दलों ने भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) और कांग्रेस के नेतृत्व वाले संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) के विकल्प के रूप में एक राजनीतिक गठबंधन का गठन किया। उत्तर प्रदेश से बसपा और समाजवादी पार्टी, बिहार से जनता दल (यूनाइटेड), ओडिशा से बिजू जनता दल, असम से असम गण परिषद और तेलंगाना से टीआरएस उन क्षेत्रीय दलों में से एक थे जिन्होंने सर्वसम्मति से कांग्रेस और भाजपा की समृद्ध आर्थिक नीतियों के खिलाफ तीसरा मोर्चा शुरू करने का फैसला किया। मोर्चे को “सांप्रदायिक और फासिस्टवादी ताकतों के विकास” का मुकाबला करने के लिए और किसानों, दलितों, अन्य पिछड़े वर्गों, महिलाओं और नाबालिगों के प्रति अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि करने के लिए स्थापित किया गया था।