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प्रियंका गांधी, उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की आखिरी उम्मीद!

Posted by Admin on February 7, 2019 | Comment

 Priyanaka Gandhi

लोकसभा चुनाव आने से ठीक पहले प्रियंका गांधी की भारतीय राजनीति में एंट्री से एक उबाल सा आ गया है। वैसे तो प्रियंका गांधी भारतीय राजनीति का ऐसा नाम जो किसी परिचय का मोहताज नहीं। लेकिन उनके भाई और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने प्रियंका को कांग्रेस का महासचिव नियुक्त करके सियासत में एक नई पहचान देने का काम किया है। इतना ही नहीं भाई ने अपनी लाडली बहन को लोकसभा की 80 सीटों वाली यूपी की कमान भी सौंपी है ये वो यूपी है जो किसी भी राजनीतिक पार्टी को दिल्ली की सत्ता तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती है। या यूं कहें कि दिल्ली का रास्ता यूपी से होकर ही गुजरता है। हालांकि यूपी की राजनीति में किसी राजनेता के लिए अहम भूमिका निभाना आसान नहीं है। अगर आसान होता तो राहुल गांधी कांग्रेस की आखिरी उम्मीद के तौर पर प्रियंका गांधी को राज्य की बागडोर क्यों सौंपते।  कांग्रेस को अच्छी तरह से पता है कि पार्टी को यूपी में खड़ा करने के लिए किसी ऐसे मजबूत चेहरे की जरूरत है जो राजनीति की हवा का रूख बदलने की ताकत रखता हो। प्रियंका के राजनीति में आने से पहले कांग्रेस कार्यकर्ताओं द्वारा एक नारा दिया जाता था कि प्रियंका लाओ, कांग्रेस बचाओं। अब यह नारा बदलता हुआ नजर आ रहा है कि प्रियंका आओं, यूपी जीताओं  कुल मिलाकर मतलब साफ है कि प्रियंका से कांग्रेस को एक चमत्कारी जीत की उम्मीद है।

प्रियंका गांधी के राजनीति में आने से कांग्रेस को फायदा

प्रियंका गांधी से कांग्रेस को काफी उम्मीदें है। पार्टी को लगता है कि आने वाले समय में प्रियंका गांधी भाजपा पर भारी पड़ेगी। इससे पहले सक्रिय राजनीति में न होते हुए भी प्रियंका गांधी ने कई बार भाजपा व कई विरोधी दलों को करारा जबाव दिया है। इसके अलावा प्रियंका की हिन्दी में पकड़ भी राहुल गांधी से काफी अच्छी है। प्रियंका के रूप में पार्टी को मोदी के बराबर बोलने वाला एक नेता मिल गया है। इसके साथ ही महिला होनें के नाते उन्हें राज्य की अन्य महिलाओं का भी साथ मिलेगा। प्रियंका के आने से युवा पीढ़ी भी पार्टी का हाथ थाम सकती है। इसके अलावा विरोधी भी महिला होनें के नाते उन पर हमला करने से बचेंगे। कांग्रेस को आशा है कि प्रियंका गांधी पार्टी के भीतर और बाहर यानी सहयोगी दलों के साथ रिश्ते सुधारने में मदद कर सकती हैं। जो लोग राहुल गांधी से सहज नहीं है वो प्रियंका के साथ अपनी बात कर सकते हैं। ये सभी तथ्य कांग्रेस के लिए फायदेमंद है। पर इन सभी तथ्यों से चुनाव तो नहीं जीता जा सकता। इसके लिए प्रियंका गांधी यूपी के चुनावी समीकरण को साधने की कोशिश कर रही है। शायद इसी कारण वह विदेश से वापस आने के बाद, आगामी लोकसभा चुनाव के लिए यूपी का सियासी खाका तैयार करने में जुट गई है।

आसान नहीं यूपी की राह

उत्तर प्रदेश देश का वो राज्य है जिसकी सियासी जमीन पर पैर जमाना कोई आसान काम नहीं है। यहां गेंद कब किसके पाले में चली जाए, कुछ भी कहा नहीं जा सकता। 1989 से पहले ब्राह्मण, दलित और मुस्लिम कांग्रेस के मजबूत वोट माने जाते थे लेकिन 1989 से कांग्रेस से ये वोटबैक अलग होता चला गया। जिसमें बाह्मण भाजपा के साथ चला गया है और दलित मायावती के साथ हो गया है। बाद में दालित समुदाय में भाजपा ने सेंधमारी की है। 1992 के बाद से मुस्लिम समुदाय समाजवादी पार्टी की तरफ बढ़ता चला गया है। हालांकि अब 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले ये कहना कि कौन-किसके साथ है थोड़ा मुश्किल है। मौजूदा समय में कोई भी तबका किसी एक के साथ नजर नहीं आ रहा है। जिसकी कई बड़े कारण भी है। राज्य की तीनों सक्रिय पार्टियाँ सपा-बसपा और भाजपा के साथ कोई भी समुदाय एकजुट नजर नहीं आ रहा, लेकिन इसका ये मतलब बिल्कुल नहीं है कि इन पार्टियों का मजबूत वोटबैंक नहीं है। यूपी में कांग्रेस उन लोगों के लिए एक विकल्प हो सकती है जो इन तीनों से नाराज है। फिलहाल कांग्रेस के लिए ऐसी साफ स्थिति अभी तो नजर नहीं आ रही। इन सब बातों से एक बात तो स्पष्ट है कि इस बार पूर्वी यूपी में भाजपा के लिए मुश्किल आने वाली है। हालांकि गठबंधन के सामने कांग्रेस की चुनौती कमजोर है। कांग्रेस अगर ब्राह्मण को जोड़ने में कामयाब हो गई तो पासा पलट सकती हैं। मजबूत वर्ग के साथ मुस्लिम और कमजोर वर्ग कांग्रेस के साथ जुड़ सकता है। कांग्रेस को एक ऐसी जाति के सहारे की जरूरत है जो उसके लिए बूथ पर खड़ी हो सके। यही फैक्टर कांग्रेस की कमजोर कड़ी है। इसके अलावा कांग्रेस को पूर्वी यूपी में सभी सीट पर जिताऊ और आर्थिक तौर पर मजबूत उम्मीदवारों की जरूरत है। ये भी बड़ा काम है।

यूपी में कमजोर कांग्रेस को प्रियंका से चमत्कार की उम्मीद

यूपी में कांग्रेस को प्रियंका गांधी से एक चमत्कारी जीत की उम्मीद है कि प्रियंका पुराने वोटबैक को लाने में अहम भूमिका निभाएगी। कांग्रेस को लगता है कि प्रियंका गांधी के आने के बाद अल्पसंख्यक के पास कांग्रेस का विकल्प है। पार्टी का कहना है कि पहले लोगों के पास एसपी-बीएसपी के अलावा और कोई विकल्प नहीं था। कुल मिलाकर प्रियंका गांधी कांग्रेस का मास्टर स्ट्रोक हैं और इससे सभी विरोधी दल परेशान हैं। कांग्रेस के कार्यकर्ताओं में प्रियंका गांधी को लेकर भारी उत्साह है। पर ये उत्साह लोकसभा चुनाव में कितना असर दिखाएगा ये तो आने वाला वक्त ही बताएगा।