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जानिए क्या होते हैं इलेक्टोरल बांड्स

Posted by Admin on October 30, 2018 | Comment

Electoral Bonds All You Need to Know

जानिए क्या होते हैं इलेक्टोरल बांड्स

एक इलेक्टोरल बांड से क्या तात्पर्य है?

सामान्यतयः एक बांड का अर्थ मूलधन और ब्याज के सन्दर्भ में लगाया जाता है। इलेक्टोरल बांड्स में ऐसा कोई पहलू नहीं है, वे बेयरर चेक की तरह ज्यादा प्रतीत होते हैं। एक इलेक्टोरल बांड एक राजनीतिक पार्टी को वित्तपोषित करने का एक वैध और शुद्ध माध्यम है।

सरकार ने नगदी के माध्यम से फंडिंग के चलन पर रोक लगा दी है और अपनी पसंद के राजनीतिक दल की मदद करने एक मात्र रास्ता है इलेक्टोरल बांड्स।

कोई भी व्यक्ति इन बांड्स को ऑनलाइन या चेक के माध्यम से भुगतान करके खरीद सकता है। आमतौर पर ये बांड एक प्रतिष्ठित बैंक, जैसे आरबीआई, द्वारा जारी किये जाते हैं। बैंक अलग-अलग मूल्यवर्गों के बांड्स भी जारी करता है, जैसे – 1000 के, 1 लाख के या फिर 1 करोड़ के भी। इसके बाद आप किसी भी पंजीकृत राजनीतिक दल को इन्हें उपहार स्वरुप दे सकते हैं। हालाँकि, प्राप्तकर्ता दानकर्ता के बारे में नहीं जान पायेगा लेकिन बैंक के पास पूरा विवरण मौजूद रहेगा।

राजनीतिक दल अपने बैंक खातों, जो चुनाव आयोग में पंजीकृत हों, के माध्यम से इन बांडों को पैसे में तब्दील कर सकते हैं। साथ ही, उन्हें इन बांडों को निश्चित समयावधि के भीतर भुनाना होता है, जिसके बाद वे बेकार हो जाते हैं। जब तक राजनीतिक दल अपने बांडों को भुना नहीं लेते हैं तब तक बैंक ही इन बांडों का संरक्षक होता है।

वे क्यों होते हैं महत्वपूर्ण?

अब एक राजनीतिक दल को 20000 रुपए से अधिक चंदे की जानकारी आयकर विभाग को देनी होती है। लेकिन इससे पहले छोटी-छोटी राशियों में नगदी के माध्यम से बहुत सारा चंदा दिया जाता था, जो विभाग के पास दर्ज नहीं है। इलेक्टोरल बांड्स इस समस्या का बहुत बड़ा समाधान हैं क्योंकि सारा का सारा धन हस्तांतरण अधिसूचित बैंक के साथ पंजीकृत होता है।

इसके साथ ही, इलेक्टोरल बांड प्रक्रिया के माध्यम से दानकर्ता का नाम पार्टी को पता नहीं चलेगा। पहले इनके नामों का पता चल जाता था जिसकी वज़ह से दानकर्ता द्वारा हस्तांतरित किया हुआ पैसा नगदी के प्रवाह में परिवर्तित हो जाता था। अब इलेक्टोरल बांडों के साथ, दानकर्ता द्वारा दिए गए चंदे का विवरण उसकी बैलेंस शीट में भी दर्ज होगा। यह प्रभावी रूप से सिस्टम को शुद्ध करता है।

2018 में इलेक्टोरल बांडों की तस्वीर

वित्त मंत्री अरुण जेटली ने 2 जनवरी, 2018 को इलेक्टोरल बांड्स के लिए सभी नियमों को निर्दिष्ट करते हुए एक वक्तव्य दिया था। केवाईसी (Know Your Customer) मानदंडों को पूरा करने के बाद बांडों को भारतीय स्टेट बैंक की विनिर्दिष्ट शाखाओं से खरीदा जा सकता है। उन्हें जनवरी, अप्रैल, जुलाई और अक्टूबर के महीनों में दस दिनों के लिए खरीदा जा सकता है। इसके अलावा, उन्हें केवल 1000, 10,000, 1 लाख और 1 करोड़ रुपये के गुणकों में ही खरीदा जा सकता है। सभी भारतीय नागरिक बॉन्ड खरीदने के पात्र हैं।

जेटली द्वारा जारी बयान बांड से लाभ प्राप्त करने के लिए पात्र राजनीतिक दलों को भी स्पष्ट करता है। लोग केवल उन पार्टियों को ही चंदा दे सकते हैं जो लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 29ए के तहत पंजीकृत हों और अपने पिछले आम चुनावों में 1 प्रतिशत से अधिक वोट शेयर प्राप्त किया हो।

एक राजनीतिक दल को अपने एक बैंक खाते का विवरण चुनाव आयोग को देना होता है और बांडों को 15 दिनों के भीतर भुनाना होता है।