Home » Political-Corner  » छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018: कांग्रेस बनाम भाजपा का चुनावी समर

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018: कांग्रेस बनाम भाजपा का चुनावी समर

Posted by Admin on November 11, 2018 | Comment

छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018:

छत्तीसगढ़ की धरती पर चुनावी रण का बिगुल बज चुका है। इस प्रतियोगिता में कई दल आमने सामने हैं लेकिन भाजपा और कांग्रेस इसके प्रमुख प्रतियोगी हैं और साथ ही सबसे बड़े दावेदार भी।यहाँ हुए पिछले तीन चुनावी संघर्षों में अब तक बाजी भाजपा के हाथ ही लगी है। जाहिर है भाजपा अपने वर्चस्व को खोना नहीं चाहेगी, वहीं कांग्रेस सत्ता प्राप्त करने के लिए हर संभव प्रयास कर रही है।

यह स्वाभाविक है कि जब चुनाव का समय पास आता है तब पक्ष-विपक्ष के नेता जनता को अपने पाले में लाने के लिए तरह-तरह की बयानबाजी करते हैं। उन्हें इससे फर्क नहीं पड़ता कि उनके वक्तव्य सही हैं या गलत। खास बात यह है कि जनता को बेवक़ूफ़ समझते हुए ऐसा करने में सभी दल बढ़-चढ़ कर हिस्सा लेते हैं।

चूंकि छत्तीसगढ़ विधानसभा चुनाव 2018 के पहले चरण का मतदान दिनांक 12-11-2018 को संपन्न होना है इसलिए क्षेत्र में ताबड़तोड़ रैलियों, आरोप-प्रत्यारोप और चुनावी वादोंका दौर उफान पर है। चुनाव प्रचार के अंतिम दिन शनिवार को कांग्रेस और भाजपा के नेताओं ने एक-दूसरे पर जमकर जुबानी हमला बोला।

कांकेर में राहुल गांधी ने पीएम नरेंद्र मोदी पर हमला बोला। राहुल ने कहा कि अब चौकीदार भ्रष्टाचार की बात नहीं करता है। राहुल ने कहा, “मोदी जी कहते हैं वह करप्शन के खिलाफ लड़ रहे हैं, लेकिन बात जब छत्तीसगढ़ की होती है तो वो आपको नहीं बताते हैं कि सीएम भ्रष्ट हैं, आपका 5 हजार करोड़ रुपया चिट-फंड स्कैम में गायब हो गया, 310 एफआईआर दर्ज किये गये, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं हुई क्योंकि इसमे सीएम शामिल थे।

वहीं संकल्प पत्र जारी करते हुए अमित शाह ने कहा, “अभी एक मणिकंचन योग है, केंद्र में मोदी जी की सरकार है और राज्य में रमन सिंह जी की सरकार है और ये दोनों सरकार राज्य को और आगे ले जाएंगे।” अमित शाह ने कहा कि किसानों को मुफ्त में अल्पकालीन लोन देने वाला छत्तीसगढ़ पहला राज्य है।

अमित शाह ने इस दौरान नक्सलवाद और कांग्रेस पर जमकर प्रहार किया। अमित शाह ने कहा कि जिस पार्टी को नक्सलवाद में क्रांति दिखाई देती हो, नक्सलवाद क्रांति का माध्यम दिखाई पड़ता हो वो छत्तीसगढ़ का भला नहीं कर सकती है। उन्होंने कहा कि उन्हें नक्सलवाद में क्रांति नहीं दिखाई देती है।

किसके वादे, किसके आरोप प्रभावी साबित होंगे यह तय करने का काम जनता का है, बहरहाल इस बार उम्मीद की जा रही है कि कांग्रेस और भाजपा के बीच टक्कर कांटे की होगी। क्योंकि कांग्रेस को राज्य में सत्ता का स्वाद चखने के लिए काफी लम्बा इंतजार करना पड़ा है और यह भाजपा के लिए सत्ता विरोधी लहर पैदा करने के बड़े दांव पेंच अपना रही है, वहीं भाजपा ने भी सत्ता विरोध की संभावनाओं को देखते हुए कुछ सीटों पर उमीदवार बदले हैं।

फिलहाल दोनों खेमे डट कर मैदान में हैं। चूंकि छत्तीसगढ़ एक नक्सल प्रभावित क्षेत्र है इसलिए जीत चाहे किसी भी खेमे में जाए लेकिन एक सफल चुनाव लोकतंत्र की विजय सुनिश्चित करेगा।