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क्या कांग्रेस के लिए मुसीबत बन सकते हैं रॉबर्ट वाड्रा?

Posted by Admin on February 12, 2019 | Comment

 Robert vadra

लोकसभा चुनाव होने में अब लगभग दो महीने का समय ही शेष बचा है, ऐसे में सभी राजनीतिक दलों के बीच आरोप-प्रत्यारोप का सिलसिला भी शुरू हो चुका है। कल तक जो कांग्रेस राफेल को लेकर भाजपा पर भष्टाचार का आरोप लगा रही थी। अब वही भाजपा रॉबर्ट वाड्रा को लेकर कांग्रेस पर हमलावर है। इसका मुख्य कारण है औपचारिक तौर पर प्रियंका गांधी की राजनीति में एंट्री और उनका कांग्रेस महासचिव बनाया जाना। हालांकि भाजपा सीधे तौर पर प्रियंका गांधी पर हमला बोलने से बच रही है। मौजूदा समय में भाजपा अपने राजनीतिक फायदे के लिए रॉबर्ट वाड्रा का नाम लेकर कांग्रेस को कटघरे में खड़ा करने की कोशिश कर रही हैं। कांग्रेस ने कुछ ही दिन पहले लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने और पार्टी में नई जान फूकने के लिए प्रियंका गांधी को पार्टी महासचिव का पद देकर सक्रिय राजनीति में उतारा है। प्रियंका गांधी की राजनीति में एंट्री ने कांग्रेस को नए उत्साह से भर दिया है लेकिन प्रियंका के साथ बिन बुलाए मेहमान के तौर पर आए उनके पति रॉबर्ट वाड्रा का नाम अब कांग्रेस की मुश्किलें बढ़ाता हुआ नजर आ रहा है।

रॉबर्ट वाड्रा पर हैं भष्टाचार के आरोप

कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा के पति रॉबर्ट वाड्रा पर डीएलएफ डील को लेकर भ्रष्टाचार के आरोप हैं। डीएलएफ के अलावा ईडी भी रॉबर्ट वाड्रा की लंदन में उनकी संपत्ति को लेकर पूछताछ कर रही है। रॉबर्ट वाड्रा से ईडी ने कथित तौर पर विदेश में अवैध संपत्तियों को लेकर मनीलांड्रिंग केस में पांच घंटे से ज्यादा समय तक पूछताछ भी की। कोर्ट की तरफ से वाड्रा को केन्द्रीय जांच एजेंसी के सामने पेश होने के लिए दिए गए निर्देश के बाद यह पूछताछ शुरु हुई थी। ऐसा पहली बार है जब सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा को वित्तीय अनियमितताओं को लेकर कथित आपराधिक आरोपों में जांच एजेंसी के सामने पूछताछ के लिए पेश होना पड़ रहा है। कांग्रेस की बदकिस्मती यह है कि रॉबर्ट वाड्रा पर लगे भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच ऐसे समय में हो रही जब प्रियंका की औपचारिक तौर पर राजनीति में एंट्री हुई है। इसके साथ ही लोकसभा चुनाव भी नजदीक हैं। ऐसे में विपक्ष इन सब बातों का फायदा उठाकर कांग्रेस को घेरने की तैयारी में है।

रॉबर्ट वाड्रा के विवादित व्यापारिक सौदों का ब्यौरा कांग्रेस के लिए मुश्किलें पैदा कर सकता है। कांग्रेस के लिए “वाड्रा” प्रॉब्लम का एक ट्रेलर तब देखा गया जब कांग्रेस मुख्यालय पर प्रियंका गांधी के पोस्टर्स को रातों रात हटाया गया। इसका मुख्य कारण यह था कि इन पोस्टर्स में प्रियंका गांधी के साथ-साथ उनके पति रॉबर्ट वाड्रा और कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी भी थे। इन सब चीजों से एक बात तो स्पष्ट है कि प्रियंका के राजनीति में आने से पार्टी का ग्राफ तो बढ़ेगा लेकिन साथ ही कई नई चुनौतियां भी जन्म लेंगी। ऐसा नहीं है कि कांग्रेस नेताओं को अंदाजा नहीं था कि प्रियंका गांधी के लिए रॉबर्ट वाड्रा मुसीबत बन सकते हैं लेकिन उनका मानना था प्रियंका के आने से जमीनी स्तर के कार्यकर्ताओं में जोश आएगा। पार्टी कार्यकर्ताओं के ऊपर हमारी राय स्पष्ट नहीं है, पर एक बात है जो पूरी तरह से स्पष्ट है कि आने वाले समय में कांग्रेस की राह आसान नहीं होगी।

राजनीतिक फायदे के लिए विपक्ष कांग्रेस पर कर सकता है “वाड्रा” वार

प्रियंका गांधी को कांग्रेस का महासचिव बनाए जाने के बाद से विपक्ष कांग्रेस पर परिवारवाद और वंशवाद की राजनीति करने का आरोप लगा रहा है। हालांकि विपक्षी पार्टी भाजपा पहले भी कांग्रेस पर कई बार परिवारवाद का आरोप लगाती रही हैं। राजनीतिकारों का मानना है कि प्रियंका वाड्रा को आने वाले समय के लिए तैयार रहना चाहिए, क्योंकि प्रियंका की राजनीति में एंट्री से कांग्रेस में जो उत्साह है इससे कही न कही विपक्ष की चिन्ताएं बढ़ गई हैं। जाहिर सी बात है कि ऐसी स्थिति में भाजपा कांग्रेस के जोश को कम करने के लिए वाड्रा के नाम का सहारा लेगा। ऐसी स्थितियों से निपटने के लिए कांग्रेस अध्यक्ष और महासचिव प्रियंका गांधी को तैयार रहना चाहिए। हालांकि इस मामले पर कांग्रेस सूत्रों का साफ तौर पर कहना है कि अभी तक जांच में रॉबर्ट वाड्रा पर आरोप सिद्ध नहीं हुए हैं। ऐसे में अगर भाजपा, रॉबर्ट वाड्रा को लेकर किसी भी विवाद को जन्म देगी या इस मुद्दे को सियासी बनाने की कोशिश करेगी तो हम उसका मुंहतोड़ जवाब देंगे। कांग्रेस द्वारा कही जा रही ये बातें कुछ हद तक सही भी हैं क्योंकि आरोप प्रियंका गांधी के पति पर है तो इसका खामियाजा प्रियंका गांधी क्यों भुगतें। भाजपा के इन सारे आरोपों को हम राजनीति से प्रेरित भी कह सकते हैं। आखिर प्रियंका है तो भारतीय नारी वो तो बस अपना पत्नी धर्म निभा रही हैं। ये बात अलग है कि उन पर देश की सबसे पुरानी पार्टी कांग्रेस की साख को बचाने की जिम्मेदारी है।

लोकसभा चुनाव में अब कुछ ही समय शेष बचा है ऐसे में सभी राजनीतिक पार्टियां एड़ी चोटी का जोर लगा रही हैं। 2014 के लोकसभा चुनाव में बुरी तरह हताहत हुई कांग्रेस इस बार 2019 में अपना बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश में लगी हुई है। शायद इसलिए पार्टी ने लोकसभा चुनाव से ठीक पहले अपनी सियासी जमीन को मजबूत करने के लिए प्रियंका गांधी को चुनावी मैदान में उतारा। अब यह देखना और भी दिलचस्प होगा कि प्रियंका गांधी “वाड्रा” सभी चुनौतियों का सामना करते हुए विरासत में मिली अपनी सियासत को कितना आगे बढ़ा पाएगी।