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उरी, पठानकोट और पुलवामा आतंकी हमला, आखिर कब तक सहेगा देश?

Posted by monika shukla on February 19, 2019 | Comment

उरी, पठानकोट और पुलवामा आतंकी हमला, आखिर कब तक सहेगा देश? 5.00/5 (100.00%) 3 votes

Uri, Pathankot and Pulwama, How long will the country bear

पुलवामा आतंकी हमले में 40 से ज्यादा जवानों की शहादत से पूरे देश में आक्रोश का माहौल है। सवा सौ करोड़ देशवासियों के दिल में इस समय सिर्फ एक ही आवाज उठ रही है कि बस अब और नही सरकार इस हमले का मुहतोड़ जवाब दे। पुलवामा में हुए आतंकी हमले की जिम्मेदारी चरमपंथी संगठन जैश-ए-मोहम्मद ने ली है। ये संगठन पाकिस्तान की जमीन से अपनी गतिविधियों को संचालित करता है। ऐसे में केंद्र की नरेंद्र मोदी सरकार ने पाकिस्तान को कठघरे में खड़ा करते हुए उससे मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा वापस ले लिया है।

आत्मघाती हमलावर के रूप में सुरक्षाबलों के सामने आई एक नई चुनौती

पुलवामा हमले के बाद हो रहे विरोध प्रदर्शनों के दौरान पाकिस्तान को ‘सबक सिखाने’ की मांग की जा रही है। टीवी चैनलों में भी कई बहसों के दौरान युद्धोन्माद खड़ा करने की कोशिश दिखाई देती है। पाकिस्तान समर्थित आतंकियों पर लगाम लगाने में सफलता पाने के बावजूद सुरक्षा एजेंसियां श्रीनगर-जम्मू हाइवे को सुरक्षित करने के लिए अभी भी संघर्ष कर रही हैं। 2017 में हुए हमले के बाद हाइवे पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए, अतिरिक्त बलों को तैनात किया गया और सुरक्षाबलों के काफिले में सिविलियन गाड़ियों की एंट्री पर रोक लगाई गई लेकिन पुलवामा हमले ने अहम हाइवे की सुरक्षा की पोल खोल दी है। इसके अलावा सुरक्षाबलों के सामने एक आत्मघाती हमलावर के रूप में एक नई चुनौती भी सामने आ गई है।

अभी कुछ दिन पहले रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण ने कहा था कि साल 2014 के बाद देश पर कोई बड़ा आतंकी हमला नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व वाली सरकार ने यह सुनिश्चित किया कि आतंकियों को शांति भंग करने का कोई मौका न मिले। रक्षामंत्री के इस बयान के बाद कांग्रेस ने निर्मला सीतारमण को आड़े हाथों लिया था और उन्हें पठानकोट और उरी आतंकी हमले की याद दिलाई थी। रक्षा मंत्री के इस बयान के कुछ दिन बाद ही पुलवामा हमला हुआ है। पिछले चार दिनों में कश्मीर में अब तक 45 जवान शहीद हो चुके हैं। सरकार सेना को एक्शन की खुली छूट दे चुकी है लेकिन क्या यह आतंकवाद की जड़ों को काटने के लिए काफी है।

लोकसभा चुनाव से दो महीने पहले आतंकियों ने दिया घटना को अंजाम  

मौजूदा समय में पूरे देश में गुस्से और शोक की लहर है। देश का राजनीतिक समुदाय एक स्वर से पाकिस्तान को सबक सिखाने का संकल्प जाहिर कर रहा है। सत्ताधारी राजनेताओं के बयान फिर वैसे ही हैं जैसे पहले बड़े चरमपंथी हमलों के बाद हम देखते रहे हैं। पाकिस्तान को सबक सिखाने और एक-एक बूंद खून का हिसाब चुकाने की कसमें खाई जा रही हैं। सबसे अहम बात यह है कि यह जघन्य हमला ऐसे वक्त में हुआ है जब लोकसभा चुनाव में केवल दो महीने का समय शेष रह गया है। लोकसभा चुनाव से ठीक पहले हुए इस आंतकी हमले ने देश में आतंकवाद के मुद्दे को चर्चा में ला दिया है।

विपक्षी नेता भी देश की भावनाओं और राजनीतिक एकजुटता दिखाते हुए सरकार के साथ खड़े दिख रहे हैं। सर्वदलीय बैठक में सभी दलों ने आम राय से सरकार को इस बात की छूट दी कि पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए जो भी जरूरी कदम उठाए जाएंगे उन्हें विपक्ष का समर्थन हासिल होगा।

भारत सरकार ने उठाए ठोस कदम

आतंकी हमले के बाद भारत सरकार ने पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए कई कदम उठाए हैं। भारत सरकार ने पाकिस्तान से होने वाले आयात को 200 फीसदी बढ़ा दिया है, ताकि उसके लिए भारत से व्यापार आसान ना हो सके। यही नहीं, पाकिस्तान से भारत मोस्ट फेवर्ड नेशन का दर्जा भी छीन चुका है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पाकिस्तान को घेरने की तैयारी हो रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी सार्वजनिक मंचों पर यह कह चुके हैं कि उन्होंने सेना को खुली छूट दी है। वो जगह और समय खुद तय करके आतंकियों से बदला ले। कुल मिलाकर सेना, सरकार और जनता सभी के मन में बदले की आग जल रही है। इसके अलावा जम्मू कश्मीर के पाँच बड़े अलगावादी नेताओं की सरकारी सुरक्षा भी हटा दी गई है। इन अलगावादी नेताओं की सुरक्षा में लगभग 10 करोड़ रूपये सलाना का खर्च आता है। आपको बता दें भारत और पाकिस्तान के बीच अभी तक चार बड़े युद्ध हुए हैं, जो कि साल 1947-48, 1965, 1971 और 1999 में हुए। भारत ने हर युद्ध में विजय हासिल की। हालांकि युद्ध में भारत को जान-मान का काफी नुकसान हुआ था और बड़ी तादाद में भारतीय सैनिकों को शहादत देनी पड़ी।

उरी, पठानकोट के बाद पुलवामा लेकिन बदला कब

मौजूदा एनडीए सरकार के शासनकाल में इससे पहले भी दो बड़े हमले 18 सितम्बर 2016 को उरी और 2 जनवरी 2016 को पठानकोट में हो चुके हैं। उरी सैन्य छावनी पर चरमपंथी हमले में 19 सैनिक मारे गए थे और इसके 11 दिनों बाद ही नियंत्रण रेखा के भीतर घुसकर पाकिस्तानी चरमपंथी शिविरों को तबाह कर, जिसे सर्जिकल स्ट्राइक कहा गया, नरेन्द्र मोदी की सरकार ने कड़े रुख के साथ देश से यह वादा पूरा किया कि पाकिस्तान को सबक सिखाएंगे। हालांकि उरी और पठानकोट हमलों के बाद देश के भीतर सेना और अर्धसैनिक बलों ने हर आतंकी वारदात का मुंहतोड़ जवाब दिया है। यही वजह है कि इन हमलों के बाद आतंकियों के हर मंसूबे नाकाम हुए हैं। सुरक्षा बलों ने केवल जम्मू-कश्मीर में ही 2018 में तकरीबन 230 आतंकियों को मारने में सफलता प्राप्त की है। सुरक्षा बलों की इस कार्रवाई का ही नतीजा है कि आतंकी घटनाओं के लिए बेहद संवेदनशील माने जाने वाले जम्मू-कश्मीर के बारामुला जिले को पिछले महीने आतंकवाद मुक्त जिला घोषित किया गया था। 2019 के चुनावी साल में पुलवामा में जो बड़ा आतंकी हमला हुआ है। इसके बाद से पूरे देश में बदले की एक आग भड़क रही है लोगों के दिलों में दुख के साथ गुस्सा और आक्रोश है कि आखिर कब देश के जवान सरहद पर पकिस्तान की नापाक साजिशों का शिकार होते रहेंगे।

पुलवामा हमले में शहीद हुए जवानों को http://www.elections.in टीम की तरफ से भावभीन श्रद्धांजलि!

 

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