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राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018: टोंक विधानसभा सीट पर भाजपा का मुस्लिम कार्ड

Posted by Admin on December 7, 2018 | Comment

राजस्थान विधानसभा चुनाव 2018: टोंक विधानसभा सीट पर भाजपा का मुस्लिम कार्ड 5.00/5 (100.00%) 1 vote

 

 Yunus Khan and Sachin Pilot

आज राजस्थान में विधानसभा चुनावों के लिए मतदान जारी है। टोंक विधानसभा सीट इस बार दिलचस्प हो गई है। इसका पहला कारण यह है कि सचिन पायलट, जिन्हें कांग्रेसी खेमे में मुख्यमंत्री पद के सबसे बड़े दावेदारों में से एक माना जा रहा है, यहाँ से चुनाव लड़ रहे हैं और दूसरा कारण यह है कि जहाँ एक तरफ ऐसा पहली बार हुआ है जब कांग्रेस ने पिछले 46 वर्षों में यहाँ से किसी मुस्लिम उम्मीदवार को टिकट नहीं दिया है, वहीं दूसरी तरफ भाजपा ने पिछले 38 वर्षों में पहली बार किसी मुस्लिम प्रत्याशी को उतारा है। पीसीसी अध्यक्ष सचिन पायलट के खिलाफ भाजपा ने वसुंधरा सरकार के परिवहन मंत्री यूनुस खान पर दांव खेला है।

राजनीतिक समीकरण

टोंक शहर को आमिर खान पिंडारी द्वारा बनास नदी के दक्षिण में बसाया गया था और यह शहर नवाबों की रियासत हुआ करता था। यह बात दिलचस्प है कि कांग्रेस ने सन् 1972 से लेकर सन् 2013 तक टोंक विधानसभा सीट से मुस्लिम उम्मीदवारों को ही टिकट दिया है, वहीं सन् 1980 से लेकर सन् 2013 तक भाजपा ने यहाँ किसी मुस्लिम प्रत्याशी को टिकट न देते हुए सिर्फ हिन्दू उमीदवारों पर ही भरोसा जताया है। अब तक टोंक की राजनीति को हिंदू-मुस्लिम समीकरणों के आधार पर देखा गया है, लेकिन इस बार की कहानी कुछ और है।

इस सीट पर इस बार चुनाव को सांप्रदायिक नहीं बल्कि जातिगत आधार मिला है। यहाँ 80,000 अनुसूचित जाति/अनुसूचित जनजाति की मतदान योग्य आबादी के साथ-साथ 45,000 गुर्जर मतदाता हैं, वहीं मुस्लिम मतदाताओं की संख्या 70,000 है। कांग्रेस की गणना के अनुसार इसे यह उम्मीद है कि यदि मुसलमान, गुर्जर और अनुसूचित जाति के मतदाता एक साथ आते हैं तो सचिन पायलट के लिए चुनाव जीतने में कोई दिक्कत नहीं होगी।

भाजपा ने भी यहाँ एक बड़ी राजनीतिक चाल चली है और राजस्थान भाजपा के प्रमुख मुस्लिम नेता यूनुस खान को मैदान में उतारा है। पहले यह माना जा रहा था कि सचिन पायलट आसानी से चुनाव जीत जायेंगे लेकिन यूनुस खान ने इस चुनावी लड़ाई में जान फूंक दी है। मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे और केन्द्रीय मंत्री नितिन गडकरी को मंगलवार के रोड शो में अच्छा जनसमर्थन मिला था जिससे भाजपा उत्साहित है। अब 11 दिसम्बर को आने वाले चुनाव परिणाम ही बता पाएंगे कि यूनुस खान भाजपा के लिए तुरुप का इक्का साबित होते हैं या महज एक बलि का बकरा।

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