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राम मंदिर निर्माण मुद्दा बना भाजपा के गले की हड्डी

Posted by Admin on November 24, 2018 | Comment

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Ram Mandir Construction becomes a Problem for BJP

राम मंदिर निर्माण को लेकर विश्व हिन्दू परिषद और आरएसएस सरकार पर दवाब बना रही है। ये बात तो समझ में आती है क्योंकि कोई भी संगठन हो चाहे वह मुस्लिम हो या हिन्दू उसे पूरा हक है सरकार के सामने अपनी बात रखने और उसके लिए प्रर्दशन करने का, लेकिन जिस प्रकार से शिवसेना ने अयोध्या में अपना शक्ति प्रर्दशन किया उससे एक बात तो स्पष्ट है कि बात सिर्फ मंदिर निर्माण की नहीं है। इस मामले में कहीं न कहीं राजनीति की बू आ रही है, क्योंकि सवाल ये उठता है कि शिवसेना ने आज अयोध्या में मंदिर निर्माण को लेकर इतने बड़े स्तर पर अपना शक्ति प्रर्दशन क्यों किया, वो साढ़े चार साल से चुप क्यों थी। 2019 लोकसभा चुनाव से पहले उसे अयोध्या में इतनी भारी भीड़ एकत्र करने की क्या जरूरत पड़ी। शिवसेना भी तो भाजपा की सहयोगी पार्टी है आखिरकार महाराष्ट्र में दोनों पार्टियों के बीच गठजोड़ की सरकार है, गठबंधन इसलिए नहीं कह सकते क्योंकि भाजपा और शिवसेना में किसी प्रकार का बंधन तो नजर नहीं आता। कभी-कभी तो ये दोनों पार्टिया एक दूसरे के विरुद्ध नजर आती है।  

राम मंदिर का मामला आज या कल का मुद्दा नहीं हैं। यह वह मुद्दा है जो प्रत्येक पाँच साल में एक बार चुनाव के समय आता है और फिर राम के नाम पर ढोंग करने वाले राजनीतिक दलों (भाजपा) की जीत में अहम भूमिका निभाता है और फिर पाँच साल के लिए वापस चला जाता है।

अयोध्या में राम मंदिर का निर्माण हमारी (भाजपा) सरकार कराएगी, यही तो वो बात है जो भाजपा पर हिन्दूवादी संगठन का ठप्पा लगती है। भाजपा इस ठप्पे से खुश भी है और हो भी क्यों न, क्योंकि वो हिदुत्व और राम मंदिर के सहारे ही तो देश की सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी है। पर इस बार स्थिति बिल्कुल अलग है, क्योंकि देश की जनता अब पूरी तरह से समझ चुकी है कि भाजपा सिर्फ वोट के लिए राम का नाम लेती है। राम मंदिर का मुद्दा तो उसके घोषणा पत्र में हिन्दू वोटरो के लिए एक लालीपॉप का काम करती है। भाजपा सरकार को अब देश के उन मतदाताओं को जवाब देना पड़ेगा जिन्होंने उन्हें राम मंदिर निर्माण के लिए सत्ता के सिंहासन तक पहुँचा दिया।

भाजपा की केन्द्र और राज्य दोनों जगह पूर्ण बहुमत की सरकार है तो मंदिर निर्माण में क्या बाधा है, इस पर भाजपा को कानून बनाना चहिए। पर इस पर भाजपा का जवाब है कि फैसला सुप्रीम कोर्ट में होगा और हम सर्वसम्मति से भव्य राम मंदिर का निर्माण कराएंगे। भाजपा सरकार यह बात तो अच्छी तरह से जानती है कि अगर वह मंदिर निर्माण कराती है तो उसे एक पक्ष की नाराजगी का सामना करना पड़ेगा और अगर नहीं करेगी तो उसे दूसरे पक्ष के विरोध का सामान करना पड़ेगा।

जाहिर सी बात है इस पर आए फैसले से एक पक्ष तो नाराज होगा, लेकिन देखना यह है कि भाजपा को किसकी नाराजगी की ज्यादा परवाह है। कहीं भाजपा दो नावों पर तो सवारी नहीं कर रही, ये पब्लिक है सब जानती है। भाजपा अपने ही पाले में पूरी तरह से घिरी हुई नजर आ रही है। राम मंदिर का मुद्दा भाजपा के लिए गले की हड्डी बन गया है जिसे वो न निगल सकती है और न ही उगल सकती है। फिलहाल राम मंदिर निर्माण पर सभी राजनीतिक दल अपनी-अपनी सियासी रोटियाँ सेकने में लगे हुए हैं।

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