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राम मंदिर निर्माण मुद्दा बना भाजपा के गले की हड्डी
Ram Mandir Construction becomes a Problem for BJP

  राम मंदिर निर्माण को लेकर विश्व हिन्दू परिषद और आरएसएस सरकार पर दवाब बना रही है। ये बात तो समझ में आती है क्योंकि कोई भी संगठन हो चाहे वह मुस्लिम हो या हिन्दू उसे पूरा हक है सरकार के सामने अपनी बात रखने और उसके लिए प्रर्दशन करने का, लेकिन जिस प्रकार से शिवसेना ने अयोध्या में अपना शक्ति प्रर्दशन किया उससे एक बात तो स्पष्ट है कि बात सिर्फ मंदिर निर्माण की नहीं है। इस मामले में कहीं न कहीं राजनीति की बू आ रही है, क्योंकि सवाल ये उठता है कि शिवसेना ने [...]Read more

Har Hindu Ki Yahi Pukar Pehle Mandir Phir Sarkar- Googly by Shiv Sena or a Bouncer by BJP
Ayodhya

Ayodhya today is buzzing with chants imploring the government to act fast on their promise of a Ram Temple and all Ram loving folks have made their way to Ayodhya. But, I am still in Delhi and the news of a single train ferrying thousands from Maharashtra leaves me wondering how they got their reservations in a fully occupied train or what happened to the ones who actually had reserved seats before Mr Udhav Thackeray decided to arrive in Ayodhya. Nonetheless, on the face of it, the situation in Ayodhya might portray BJP to be on a sticky [...]Read more

Ayodhya: The Most Sought-After Political Destination till 2019
Ayodhya

Chinese acronyms attributing name’s derived from nature and it’s characteristics to years has always fascinated me. Hearing that the next year would the year of the dragon always seems to be more interesting than just the plain old numbers. Usually, the Indian calendar is not as exciting as the Chinese one but 2019 may present an opportunity to make it more exciting if we were to name it aptly. Attempting to do this , “The year of Ayodhya” may not be an over exaggeration if we were to follow suit with the Chinese in naming the next [...]Read more

भारत में सैन्य-शिविर (छावनी)बोर्ड चुनाव
Military camp (Cantonment) board elections in India

सभी नागरिक निकायों ने स्पष्ट रूप से प्रशासन और उनके अधीन उनके भौगोलिक क्षेत्रों के लिए क्षेत्रों का निर्धारण किया है।इसी प्रकार, कुछ भौगोलिक क्षेत्र हैं – जिनमें ज्यादातर सैन्य संस्थान होते हैं, जिन्हें छावनी क्षेत्र कहा जाता है – जहाँ निजी संपत्तियां भी स्थित होती हैं – जिसे कैंटोनमेंट बोर्ड नामक एक अलग निकाय द्वारा प्रशासित किया जाता है, जो रक्षा मंत्रालय के नियंत्रण में है।इस बोर्ड के लिए, छावनी क्षेत्र के निवासियों में से प्रतिनिधियों को चुना जाता है। छावनियां मूलतः नागरिक कस्बों से दूर और भारतीय राष्ट्रवादी प्रभाव से पृथकसैन्य गठन के स्थान के [...]Read more

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 22
Article 22 of the Constitution of India

अनुच्छेद 22, भारत के संविधान के भाग III (मौलिक अधिकार) में लेख के समूहों में से एक है, जिसेस्वतंत्रता की अभिव्यक्ति के उप-शीर्षक के तहत के साथ संग्रहित किया गया है।इस अनुच्छेद का विषय-वस्तु व्यक्तिगत स्वतंत्रता है।यह अनुच्छेद प्रत्येक गिरफ्तार व्यक्ति को कुछ मौलिकअधिकारों की गांरटी देताहै।संविधान द्वारा गांरटी प्राप्त ये अधिकार अधिकारों की तुलना में उच्च स्थिति के हैं जो केवल सामान्य कानून द्वारा प्रदान किए जाते हैं और जिनकी ऐसी कोई संवैधानिक गांरटी नहीं होती है। वास्तव में,अनुच्छेद 22 प्रारूप संविधान में मौजूद नहीं था। इसे संविधान सभा के विचार-विमर्श के बाद अंत में जोड़ा [...]Read more

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 31
Article 31 of the Constitution of India

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 31 -संविधान के अनुच्छेद 31 में न केवल निजी स्वामित्व के अधिकार की गांरटी है बल्कि उचित प्रतिबंध के अलावा प्रतिबंधों से मुक्त संपत्ति का आनंद लेने और निपटाने का अधिकार भी है। अनुच्छेद में कहा गया है कि कानूनी अधिकार के अलावा, किसी भी व्यक्ति को उसकी संपत्ति से वंचित नहीं किया जाएगा।इसमें यह भी उल्लेख किया गया है किमुआवजे का भुगतान उसी व्यक्ति को किया जाएगा जिसका संपत्ति सार्वजनिक उद्देश्यों के लिए अधिग्रहित की गई है। अनुच्छेद 31 का अर्थ अन्य मौलिक अधिकारों के विपरीत,संपत्ति के अधिकार का दायरा संवैधानिक संशोधन [...]Read more

प्रतीकात्मक रूप से चुनाव वाले 5 राज्यों में से बीजेपी के लिए कौन सा राज्य सबसे अधिक महत्व रखता है
बीजेपी

भारत में चुनावकी शुरूआत होने के साथ-साथ राजनीति भी शुरु हो गई है। अगले कुछ महीनों में 5 राज्य, विधानसभा चुनावों का सामना करेंगे और विभिन्न पार्टियां एक-दुसरे पर आरोप-प्रत्यारोपलगाना शुरू कर देंगी।चुनाव के दौरान पार्टियों के लिए मतदाता “माई बाप” होंगे और चुनाव आयोग “भगवान” होगा। छत्तीसगढ़, मिजोरम और तेलंगाना छोटे राज्य हैं और जहां तक ​​सीटों की संख्या का सवाल है, तो अगर इन तीनो राज्यों की सीटों को एक साथ मिलाकर देखें तो राज्य विधानसभा चुनावों में लगभग 250 सीटें हैं। वर्तमान में, मिजोरम और तेलंगाना अन्य पार्टियों द्वारा शासित हैं, इसलिए यह बीजेपी [...]Read more

बसपा की सीटों की माँग पूरी कर पाना सहयोगी दलों के चुनौतीपूर्ण
बसपा की सीटों की माँग

विश्वास और अतिविश्वास दो बहुत ही सामान्य शब्द हैं जो हर जगह और हर किसी पर लागू होते हैं। इन दिनों मायावती का कांग्रेस और अन्य पार्टियों के साथ समझौता वार्ता करने का तरीका अतिविश्वास से भरा हुआ है। इस लेख में मैं कुछ ऐसे ही कारणों को उजागर करना चाहता हूं कि बसपा अपनी गठबंधन पार्टियों के साथ समझौता वार्ता मेंइतनी आक्रामक क्योंहै जबकि पिछले लोकसभा चुनाव के साथ-साथ यूपी विधानसभा चुनावों में भी उनकी सीटों की संख्यामें निरंतरगिरावट देखने को मिलीहै। पहला कारण: बसपा का सीटों में तो नुकसान हुआ है लेकिन उनके वोट शेयर [...]Read more

‘स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’: अखंड भारत के सूत्रधार सरदार बल्लभभाई पटेल और उनका अविस्मरनीय योगदान
स्टैच्यू ऑफ यूनिटी’

[ नरेंद्र मोदी ] वर्ष 1947 के पहले छह महीने भारत के इतिहास में अत्यंत महत्वपूर्ण रहे थे। साम्राज्यवादी शासन के साथ-साथ भारत का विभाजन भी अपने अंतिम चरण में पहुंच गया था। हालांकि, उस समय यह तस्वीर पूरी तरह से साफ नहीं थी कि क्या देश का एक से अधिक बार विभाजन होगा। कीमतें आसमान पर पहुंच गई थीं, खाद्य पदार्थों की किल्लत आम बात हो गई थी, लेकिन इन बातों से परे सबसे बड़ी चिंता भारत की एकता को लेकर नजर आ रही थी, जो उस समय खतरे में थी। इस पृष्ठभूमि में ‘गृह विभाग’ का [...]Read more

क्या छत्तीसगढ़ में अच्छे प्रदर्शन से मध्यप्रदेश में भाजपा का रास्ता होगा आसान?
मध्यप्रदेश; मैदान संभालेंगे आरएसएस कार्यकर्ता-Monika

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव -  छत्तीसगढ़ में मतदान समाप्त हो गया है। हर तरीके से, राज्य में भाजपा बहुमत प्राप्त करते हुए दिख रही है। भाजपा के 15 साल से सत्ता में होने के बावजूद ऐसा प्रदर्शन बहुत ही सराहनीय है। पहले चरण में बस्तर और राजनंदगांव के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को कवर किया गया, जिसमें सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे अत्याधिक नक्सल प्रभावित जिले शामिल थे और यहां भाजपा का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा। 18 निर्वाचन क्षेत्रों के इस चरण में, भाजपा को 2013 में केवल 6 सीटें प्राप्त हुईं थी। नक्सलियों के खतरे के बाद भी इस [...]Read more

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