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“राम ही करेंगे बेड़ा पार” – लोकसभा चुनाव 2019 में 272 के जादुई आंकड़े के लिए मास्टर चाभी

Posted by Admin on November 26, 2018 | Comment

“राम ही करेंगे बेड़ा पार” – लोकसभा चुनाव 2019 में 272 के जादुई आंकड़े के लिए मास्टर चाभी 5.00/5 (100.00%) 1 vote

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तेरा राम ही करेंगे बेड़ा पार, उदासी मन काहे को डरे – इन लाइनों को हरि ओम शरण द्वारा गाया गया था और एल्बम 1992 में जारी किया गया था। यह वही साल था जब बाबरी मस्जिद विध्वंस हुआ और भारतीय राजनीति की धुरी एक नए मुद्दे पर केन्द्रित हो गयी। आज 2018 है और वही शोर और जुमले फिर से सुनाई दे रहे हैं। एकमात्र अंतर यह है कि 1992 के दौरान बीजेपी नायक थी और उसने जुमलों और पंक्तियों को लिखा था लेकिन इस बार जुमले बीजेपी के लिए एक अलार्म हैं।

अयोध्या में शिवसेना और वीएचपी बैठकों से स्पष्ट संदेश यह है कि कोई नकली वादा काम नहीं करेगा – “अगर तुम्हें वोट चाहिए तो हमें मंदिर चाहिए” – हिंदी में इन दिनों सोशल मीडिया पर एक लाइन बहुत लोकप्रिय हो रही है – “हर हिंदू की यही पुकार पहले मंदिर फिर सरकार”।

 इस बार स्वर आक्रामक हैं और शिव सेना जैसी पार्टियाँ जिनकी छवि हिंदुत्व को समर्थन करने वाली है, किस्सी भी हाल में हिंदू वोटों में सेंध लगाने का प्रयास कर रही हैं जो कि बीजेपी का ठोस वोट बैंक माना जाता है। यहाँ तक कि राहुल गाँधी ने भी मंदिरों में जाना शुरू कर दिया है, शिव का वंदन भी आज कल हो रहा है। कुल मिला के हर कोई उस रस्ते पर चलने का प्रयास कर रहा है जिस पर चलने की उसे आदत नहीं है। इसे विपक्ष की  नयी रणनीति के रूप में देखा जा सकता है।  

मेरे विचार में पार्टियों के पास दो प्रकार के वोट बैंक हैं, एक जो जीडीपी, मुद्रास्फीति, औद्योगिक उत्पादन और व्यवसाय कौशल जैसी शब्दावली से विकास को आंकते हैं। ये लोग पेट्रोल मूल्य, घोटालों, सौदों और निवेश जैसे विकास संबंधी मुद्दों के लिए वोट देते हैं। लेकिन ये धार्मिक मुद्दों पर वोट देने वाले समुदाय की तुलना में अल्पसंख्यक हैं जो कि मोदी, योगी आदि जैसे ब्रांड नाम पर वोट करते हैं और नकली मीडिया रिपोर्टिंग से बहुत प्रभावित रहते हैं। ये मतदाता इस बात पर ध्यान नहीं देते कि देश कैसा प्रदर्शन कर रहा है और आप इसे आंकड़ों में कैसे माप रहे हैं।

 अब विपक्ष समझता है कि पहली श्रेणी का मतदाता वैसे ही डेमोनेटाइजेशन, एससी / एसटी बिल, विदेशी नीतियों, जीएसटी इत्यादि जैसे मुद्दों से खुश नहीं है और उनके लिए एक आसानी से मिलने वाला वोट बैंक है।

 दूसरी तरफ, यदि वे अयोध्या में राम मंदिर जैसे मुद्दों पर बड़े समुदाय की भावनाओं को छूने में सफल होते हैं तो बीजेपी के लिए 272 का आंकड़ा प्राप्त करना बहुत कठिन होगा।

बीजेपी के पास एकमात्र विकल्प भगवान श्री राम की शरण में जाना ही है अन्यथा विपक्ष के इरादे बहुत स्पष्ट हैं, उन्हें राजनीति करने के अपने पारंपरिक तरीके से बाहर जाने से कोई परहेज नहीं और 2019 लोक सभा  में भाजपा को केंद्र से बाहर रखने के लिए वे जय श्री राम भी कहने को तैयार हैं और शिव का ध्यान लगाने को भी।

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