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तमिलनाडु में एआईडीएमके के साथ गठबंधन करके कितनी मजबूत हुई भाजपा?

Posted by monika shukla on February 22, 2019 | Comment

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How strong became BJP after ally with AIDMK in Tamil Nadu

लोकसभा चुनाव 2019 के लिए भाजपा अपने कुनबे को सहेज कर रखने के अलावा और भी कई नए सहयोगियों को जोड़ने में जुटी हुई है। इसका एक ताजा उदाहरण है तमिलनाडु में भाजपा का एआईडीएमके के साथ गठबंधन। तमिलनाडु दक्षिण भारत का एक अहम राज्य है, 39 लोकसभा सीटों वाला यह राज्य दिल्ली की सियासत में भी अहम भूमिका निभाता है। भाजपा इस बात को अच्छी तरह से जानती है कि दक्षिण भारत में पैर जमाने के लिए उसे वहां की किसी मजबूत पार्टी से गठबंधन करना बहुत ही जरूरी था। तमिलनाडु में 2019 की सियासी लड़ाई अब काफी दिलचस्प होती हुई नजर आ रही है। डीएमके ने जहां कांग्रेस के साथ गठबंधन किया है तो वही भाजपा के सामने एआईडीएमके समेत छोटे दलों को मिलाकर चुनावी मैदान में उतरने की चुनौती है।

तमिलनाडु में कांग्रेस को कमजोर कर सकता है गठबंधन

तमिलनाडु में भाजपा जिस प्रकार से कुशल रणनीति के तहत एआईडीएमके के साथ मिलकर चुनावी मैदान में उतरेगी उससे दक्षिण भारत में पार्टी का ग्राफ काफी बढ़ जाएगा। इसके अलावा भाजपा 2014 की अपेक्षा 2019 में दक्षिण भारत में मजबूती से उतरेगी। भाजपा और एआईडीएमके सहित बाकी दलों के बीच सीट शेयरिंग फॉर्मूला भी तय हो गया है। भाजपा और एआईडीएमके दोनों पार्टियां अपने हिस्से में से सहयोगी छोटी पार्टियों को भी कुछ सीटें देगी।

एनडीए गठबंधन की घोषणा से कई दलों को खासकर द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (द्रमुक) और कांग्रेस को एक बड़ा झटका लगा है। द्रमुक अध्यक्ष एमके स्टालिन ने पहली बार घोषणा की थी कि उनकी पार्टी कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी को प्रधानमंत्री पद के लिए उनका सहयोग करेगी। तमिलनाडु में भाजपा की नवीनतम चालबाजी कांग्रेस और द्रमुक को तमिलनाडु में थोड़ा कमजोर और असुरक्षित कर सकती है।

एनडीए ने प्रतिकूल परिस्थिति में गठबंधन की बातचीत शुरु की थी क्योंकि पीएमके भाजपा के किसी भी सदस्य से बात करने के लिए तैयार नहीं थी जो कि गठबंधन को कठिन बना रहा था। इसके बाद भाजपा ने अन्नाद्रमुक को इस सौदे पर बातचीत करने के लिए कहा। आखिरकार पीएमके को एक सुनिश्चित राज्यसभा सीट मिलने के अलावा लोकसभा के लिए सात निर्वाचन क्षेत्रों में चुनाव लड़ने का मौका मिला।

एनडीए गठबंधन की एक विशेषता यह है कि यह लेन–देन पर टिका हुआ है। उदाहरण के लिए, भाजपा तमिलनाडु में लोकसभा के लिए केवल पाँच सीटों पर चुनाव लड़ेगी क्योंकि भाजपा राज्य में अपनी कमजोर स्थिति को अच्छी तरह से जानती है। आपको बता दे कि एआईडीएमके ने 2014 के लोकसभा चुनावों में तमिलनाडु की 39 सीटों में से 37 सीटों पर जीत हासिल की थी।

दक्षिणी तमिलनाडु में भाजपा कर सकती है अच्छा प्रर्दशन

भाजपा दक्षिणी क्षेत्र विशेष रूप से कन्याकुमारी, तिरुनेलवेली और थुथुगुडी जैसे जिलों में गठबंधन के साथ मिलकर अच्छा प्रदर्शन कर सकती है। दक्षिणी तमिलनाडु में प्रमुख पिछड़े वर्ग के समुदाय नादारों के बीच राष्ट्रीय पार्टी का अच्छा खासा दबदबा है जो राज्य में पार्टी का नेतृत्व करके इसका वर्चस्व बढ़ाएगा।

ऐतिहासिक रूप से नादार राष्ट्रीय दलों का समर्थन करते रहे हैं। तमिलनाडु के उप-मुख्यमंत्री ओ पन्नीरसेल्वम और अम्मा मक्कल मुनेत्र कड़गम (एएमएमके) के संस्थापक टीटीवी दीनाकरण के बीच छिड़े विवाद के बीच अब नदारों की एक प्रमुख भूमिका होगी। इस बात से दक्षिण तमिलनाडु में भाजपा के अच्छे प्रर्दशन की उम्मीद जताई जा रही है।

आपको बता दें कि तमिलनाडु में विपक्षी दल डीएमके, कांग्रेस और वाम दल एक साथ चुनाव लड़ने का ऐलान कर चुके हैं। इस गठबंधन में कमल हासन की नई पार्टी के भी जुड़ने के आसार हैं। इन सबके बीच टीटीवी दिनाकरन तीसरे खिलाड़ी के तौर पर हैं जिन्होंने अब तक अपने पत्ते नहीं खोले हैं। इससे पहले पीएमके द्वारा यूपीए के साथ भी बातचीत की खबरों की चर्चा थी। 2014 लोकसभा चुनाव में एआईएडीएमके, भाजपा और पीएमके ने अलग-अलग चुनाव लड़ा था। जिसमें एआईएडीमके ने 37 सीटों पर जीत दर्ज की थी। जबकि भाजपा के खाते में 1 और पीएमके के खाते में 1 सीट आई थी।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह के नेतृत्व में तमिलनाडु में ऑल इंडिया अन्ना द्रविड़ मुनेत्र कझगम और कई छोटे राजनैतिक दलों के साथ गठबंधन का ऐलान किया गया था। भाजपा और एआईडीएमके अपनी सीटों में से छोटे दलों को भी सीट देने के लिए तैयार हो गए है।

कुल मिलाकर 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा पूरी तरह खुद को और पार्टी को मजबूत करने में लगी हुई है क्योकि भाजपा को अच्छी तरह से पता है कि 2014 की अपेक्षा इस बार हवा का रूख उसकी तरफ पूरी तरह से साफ नहीं है। ऐसे में वह देश के हर कोने से नए सहयोगियों को तलाशने में लगी हुई है। राजनीतिकारों का मानना है कि तमिलनाडु में भाजपा एआईडीएमके के साथ गठबंधन करके दक्षिण में एक मजबूत पार्टी बनकर उभरेगी।

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