Track your constituency

Home » Political-Corner  » पीएम मोदी के विकास मॉडल पर कितना आगे बढ़ा भारत?

पीएम मोदी के विकास मॉडल पर कितना आगे बढ़ा भारत?

Posted by monika shukla on February 26, 2019 | Comment

पीएम मोदी के विकास मॉडल पर कितना आगे बढ़ा भारत? 5.00/5 (100.00%) 1 vote

How much India is ahead on PM Modi's development model?

नरेन्द्र मोदी, भारतीय राजनीति का एक ऐसा नाम, जो इस समय देश के बच्चे-बच्चे की जुबान पर है। 2014 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के सामने कोई भी पार्टी टिक नहीं पाई। कांग्रेस विरोधी लहर के खिलाफ ‘मोदी लहर’ के विजय रथ पर सवार 63 वर्षीय गुजरात के मुख्यमंत्री ने भाजपा को स्पष्ट बहुमत दिलाने के साथ ही पूरे भारत में अपनी उपस्थिति का अहसास कराया, जो पहले कभी नहीं देखा गया। 1984 के बाद के 30 वर्षों में भाजपा ऐसी पहली पार्टी बनी जिसने अपने दम पर बहुमत हासिल किया है। अब मोदी सरकार का पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा होने जा रहा है। इसको लेकर लोगों की अलग-अलग राय है। कई लोग मोदी के काम से खुश हैं और कई लोग नाखुश।

मोदी सरकार द्वारा किए गए कई ऐतिहासिक फैसले

26 मई 2014 को जब नरेन्द्र मोदी ने प्रधानमंत्री पद की शपथ ली तो देश समेत दुनिया भर में इस बात की सुगबुगाहट उठी कि अब भारत विकास की रफ्तार पकड़ेगा, बदलाव होंगे। मोदी सरकार आने के बाद से लोगों में एक जोश देखने को मिला। लोगों की आंखो में नए ख्वाब घर करने लगे। मोदी सरकार ने अपने कार्यकाल में नोटबंदी से लेकर जीएसटी, तीन तलाक और सवर्ण आरक्षण बिल जैसे कई बड़े ऐतिहासिक फैसले किए। ये सभी हमारे देश के ऐसे मुद्दे थे जिन पर सिर्फ राजनीति होती थी फैसले नहीं लेकिन मोदी सरकार के आने के बाद से इन मुद्दे पर फैसले आए। हाँ वो बात अलग है कि मोदी सरकार को वो लोग नकारा बता रहे हैं, जिन्हें देश की अर्थव्यवस्था से खिलवाड़ नहीं करने दिया गया, जिन्हें टैक्स न देने पर जुर्माना भरना पड़ रहा है। मोदी सरकार द्वारा किए गए काम वाकई सराहनीय है लेकिन कुछ काम ऐसे भी है जिनका वादा मोदी सरकार ने किया था लेकिन वह उन वादों पर खरा उतरने में नाकाम रही जिसका एक उदाहरण राम मंदिर भी है। पर सिर्फ कुछ कामों के पूरा न हो पाने के कारण हम मोदी सरकार की उपलब्धियों को अनदेखा नहीं कर सकते।

मोदी सरकार की बड़ी उपलब्धियां

भ्रष्टाचार मुक्त सरकार

नरेंद्र मोदी सरकार की खास बात ये है कि इस सरकार के मंत्री भ्रष्टाचार से दूर रहे हैं। जिस तरह पिछली सरकार 2-जी स्कैम, कोयला स्कैम, कॉमनवेल्थ स्कैम, चॉपर स्कैम, आदर्श स्कैम के आरोपों में घिरी रही, उससे उलट मोदी सरकार में भ्रष्टाचार के मामले कम आए। हालांकि राज्य सरकारों पर घोटालों के आरोप लगे है।

मोदी सरकार की मजबूत विदेश नीति

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अकेले ही भारत को अंतर्राष्ट्रीय कूटनीति के केंद्र मंच पर ले जाने का दावा कर सकते हैं। भारत ने अमेरिका के साथ एक मजबूत संबंध स्थापित किया है, सावधानीपूर्वक रूस को अपने पक्ष में रखते हुए निवेश तथा सामरिक सहयोग के लिए जापान के साथ अपने संबंधों को मजबूत किया है। भारत ने पड़ोसी देश बांग्लादेश से भी अपने रिश्तों को मजबूत किया है। हालांकि, सरकार नेपाल, श्रीलंका और मालदीव के जरिये चीनी वस्तुओं का प्रभाव भारत में कम करने के लिए संघर्ष कर रही है।

जन-धन योजना

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने साल 2014 में जन-धन योजना की घोषणा स्वतंत्रता दिवस के मौके पर की थी। इस योजना का मकसद देश के हर नागरिक को बैंकिंग सुविधा से जोड़ना है और इस योजना के तहत 31.31 करोड़ लोगों को फायदा भी मिला है।

जीएसटी- इस नए टैक्स सिस्टम में सभी वस्तुओं का अलग-अलग टैक्स नहीं देना होगा और पूरे देश में एक जैसी टैक्स व्यवस्था लागू की गई है।

उज्जवला योजना- यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में रहने वाले उन परिवारों के लिए वरदान साबित हुई है, जिनके पास गैस कनेक्शन नहीं था और उन्हें खाना बनाने के लिए कई मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। इस योजना के माध्यम से गरीब परिवारों तक एलपीजी कनेक्शन पहुंचाया गया और ग्रामीण महिलाओं को सशक्त भी किया गया। सरकारी आंकड़ों के अनुसार 3 करोड़ परिवार इसके लाभार्थी हैं।

आतंकवाद के खिलाफ सख्त रवैया

एनडीए सरकार ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त रवैया अपनाया है, जो कि स्पष्ट रूप से दिखाई दे रहा है, लेकिन इन प्रयासों के बाद भी छत्तीसगढ़, महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश और ओडिशा के माओवादी प्रभावित इलाके अभी भी इससे जूझते नजर आ रहे हैं। हालांकि, सरकार जम्मू-कश्मीर को अपनी राजनीतिक अधीनता में ला चुकी है जहाँ पर आतंकवादी गतिविधियों के अधिकतम मामले होते हैं। अभी हाल ही में पुलवामा में हुए आतंकी हमले के बाद पीएम मोदी ने जैश के आंतकी ठिकानों पर बड़ी कारवाई भी की है।

स्वच्छ भारत अभियान- इसकी शुरुआत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपने कार्यकाल के पहले साल से ही की थी और उसे कामयाबी भी मिली। इस योजना के तहत पूरे देश में सफाई के लिए विशेष कार्य किए गए हैं, जिसमें शौचालय निर्माण से लेकर कचरा निस्तारण भी शामिल है।

2014 में भारत में ग्रामीण क्षेत्र में सिर्फ 39 प्रतिशत तक ही शौचालय थे। जो देश में आजादी के बाद बने कई भारत रत्न प्राप्त प्रधानमंत्रियों का रिपोर्टकार्ड पेश करते है। मोदी ने सत्ता में आते ही 100 प्रतिशत तक हर गांव, हर घर, में स्वाच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय बनवाने का लक्ष्य रखा। आज भारत के लगभग प्रत्येक घर में शौचालय है। इससे पहले किसी भी सरकार ने इस मुद्दे को लेकर कभी भी इतने बड़े पैमाने पर चिंता जाहिर नहीं की थी। अगर आजादी के बाद किसी भी सरकार ने शौचालय के मुद्दे को गभीरता से लिया होता तो जब अमेरिका चांद पर जमीन तलाश रहा था तब हम भारत में शौचालय का निर्माण नहीं करा रहे होते। एक दो नहीं बल्कि मोदी सरकार ने ऐसे कई फैसले लिए है जो देशहित में है चाहे वह हर घर बिजली पहुचाने की बात हो या चाहे अंतर्राष्ट्रीय तौर पर पाक को घेरना हो।

प्रमुख झटके

विमुद्रीकरण सरकार द्वारा उठाया गया यह कदम गलत साबित हुआ है, सरकार ने क्या वादा किया था और क्या इससे हासिल हुआ है इसने एक पुनर्प्राप्ति अर्थव्यवस्था को बाधित कर दिया और सरकार की उपलब्धियों को कम कर दिया।

एनपीए में वृद्धि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के निजीकरण सहित वित्तीय प्रणाली में सुधारों की तत्काल आवश्यकता है। इसके अलावा, एयर इंडिया, रेलवे और कई अन्य पीएसयू जैसे कई पीएसयू को कम से कम आंशिक रूप से निजीकरण की आवश्यकता है। मजबूत बहुमत के बावजूद, सरकार अपने कार्यकाल के दौरान इन सुधारों को हल करने में विफल रही है।

मोदी सरकार में पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए भी कई काम किए गए, जिसमें कोयला ब्लॉक आंवटन में पारदर्शी नीलामी, पर्यावरण संबंधी मंजूरियों के लिए ऑनलाइन आवेदन, कई निविदाओं के लिए ऑनलाइन व्यवस्था की शुरुआत की गई। साथ ही सब्सिडी जैसी सुविधाओं में पारदर्शिता की गई।

कई मुद्दों पर विपक्ष दलित उत्पीड़न, गौरक्षक-दल, राष्ट्रगान, तिरंगा फहराना, कश्मीर में पत्थरबाजों के खिलाफ पैलेट गन का इस्तेमाल करने का आदेश, पेट्रोल-डीजल की कीमतों में बढ़ोत्तरी और महंगाई के साथ-साथ रोजगार के मुद्दे पर मोदी सरकार पर हमलावर रहा। हालांकि इन सब मुद्दे के तहत हम मोदी सरकार द्वारा किए गए कामों की अनदेखी नहीं कर सकते।

मोदी सरकार ने अपने पाँच सालों के कार्यकाल में जिन कामों को सौ प्रतिशत तक करने का वादा किया था हो सकता है वो सौ प्रतिशत तक पूरे नहीं हुए लेकिन 80 प्रतिशत तक पूरे हुए हैं इसमें कोई संदेह नहीं है। मोदी सरकार के पाँच वर्ष के कार्यकाल में विकास एक जीवंत जन आंदोलन बनकर सामने आया, जिसमें प्रत्येक नागरिक भावना भारत के विकास को आगे ले जाने में शामिल है।

Pin It

<