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तीन राज्यों में भाजपा पर भारी पड़ सकती है कांग्रेस

Posted by Admin on December 9, 2018 | Comment

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Will Congress Win 3 States

 

अगर तीन राज्यों में भाजपा हारी तो जिम्मेदार कौन?

पाँच राज्यों में हो चुके विधानसभा चुनावों को 2019 का सेमीफाइनल कहा जा रहा है। तमाम एग्जिट पोल  के मुताबिक भाजपा को अपने सत्तारुढ़ राज्यों राज्यस्थान, मध्यप्रदेश और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस से कड़ी चुनौती मिलती दिख रही है। वहीं तेलंगाना में फिर से टीआरएस के सत्ता में वापसी के आसार लग रहे हैं। मिजोरम में भी एमएमएफ सत्ता हासिल कर सकती है लेकिन यहाँ पर कांग्रेस उसको टक्कर देती हुई नजर आ रही है। हालाँकि ये सिर्फ कयास हैं न कि परिणाम।

पर इन सबके बीच एक प्रश्न उठ रहा है कि अगर तीन बड़े राज्यों में भाजपा हारी या किसी भी राज्य में मुश्किल दौर से गुजरकर उसकी सरकार बनी तो वह अपनी नाकामयाबी का ठीकरा किसके सर फोड़ेगी? दूसरी तरफ अगर 5 राज्यों में से 2 या 3  राज्यों के नतीजे कांग्रेस के पक्ष में आते हैं तो इससे 2019 के आम चुनावों के लिए पार्टी का मनोबल बढ़ जाएगा। इसके अलावा राहुल गांधी के नेतृत्व पर उठ रहे सवालों पर भी विराम लगेगा।

महारानी को जीत दिलाने के लिए मैदान में उतरे थे महारथी

राजस्थान में महारानी को जीत दिलाने के पीएम मोदी ने 13 रैलिया की हैं दूसरी तरफ अमित शाह ने भी प्रदेश के लगभग सभी जिलों का दौरा किया और 38 से 40 कार्यक्रम व सभाएं की हैं। वसुंधरा राजे ने भी 75 रैलियां कीं। पार्टी के दूसरे नेताओं ने कुल 222 रैलियां और 15 रोड शो किए। इसके बावजूद एक्जिट पोल में भाजपा की करारी हार नजर आ रही है। ऐसी सूरत में भाजपा को जीत मिलती है तो निश्चित रूप से जीत का श्रेय पीएम मोदी और पार्टी के आला नेताओं को दिया जाएगा। राजस्थान में मोदी की रैली के दौरान ‘मोदी तुमसे वैर नहीं, वसुंधरा तेरी खैर नहीं’ के नारे सीधे तौर पर वैसे भी वसुंधरा राजे के नेतृत्व पर सवाल खड़े कर रहे हैं। पर इन सबके बावजूद हार के लिए जिम्मेदारी किसकी होगी, ये काफी अहम सवाल है।

मामा भी मुश्किल में

राजस्थान के बाद अब बात करें मध्यप्रदेश की तो वहाँ पिछले 15 सालों से शिवराज सिंह की सरकार है। 15 सालों से सत्ता में रहने के बाद शिवराज के खिलाफ जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर देखने को मिली और इस लहर में एससी-एसटी ने भी अपनी अहम भूमिका निभाई है। वैसे मध्यप्रदेश में शिवराज की सत्ता वापसी की उम्मीदें दिख रही हैं पर यहाँ भी विपक्ष उसे कांटे की टक्कर दे रहा है।

छत्तीसगढ़ में 15 सालों से काबिज भाजपा

छत्तीसगढ़ की सत्ता पर 15 साल से काबिज भाजपा और कांग्रेस के बीच कांटे की टक्कर देखने को मिलती दिख रही है। छत्तीसगढ़ राज्य में इस बार 76.35% मतदान दर्ज किया गया है जबकि 2013 चुनावों में यह प्रतिशत 77.45% था। पिछले कई चुनावों में एग्जिट पोल के सटीक आँकड़े दे चुके   http://www.elections.in  ने इस बार फिर से छत्तीसगढ़ राज्य में भाजपा के सिर पर ताजपोशी की भविष्यवाणी की है। हालाँकि परिणाम में बदलाव हो सकता है। अब सभी पार्टियों को 11 दिसंबर का इंतजार है।

जीत का सेहरा तो हर कोई पहनना चाहता है लेकिन हार का सेहरा अपने सर कोई नहीं बाधना चाहता। ऐसे में अगर भाजपा को तीन राज्यों में हार का सामना करना पड़ा तो इसका ठीकरा पार्टी किसके सर फोड़ेगी?

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