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तेलंगाना में चंद्रबाबू नायूड से गठबंधन करके कांग्रेस को फायदा या नुकसान?

Posted by Admin on November 30, 2018 | Comment

तेलंगाना में चंद्रबाबू नायूड से गठबंधन करके कांग्रेस को फायदा या नुकसान? 5.00/5 (100.00%) 7 votes

Telangana Chandrababu Naidu

पाँच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों को 2019 के लोकसभा चुनाव के सेमीफाइनल के तौर पर देखा जा रहा है। आपने राजनीति में कई गठबंधनों को बनते बिगड़ते देखा होगा। आज हम बात कर रहे हैं तेलंगाना की, जहाँ एक नए गठबंधन की नीव रखी गई है। देश के 3 बड़े राज्यों के चुनावी शोरगुल में तेलंगाना की चर्चा भले ही कम रही हो लेकिन लोकसभा की सीटों के लिहाज से यह काफी महत्वपूर्ण राज्य है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी चंद्रबाबू नायडू की पार्टी तेलुगु देशम से गठंबधन करके जिस तरह से भाजपा को राज्य से खदेड़ने की कोशिश कर रहे हैं उससे तो स्पष्ट होता है, कि तेलंगाना में सत्तारूढ़ पार्टी टीआरएस के खिलाफ कांग्रेस के साथ गठबंधन‌ की कामयाबी, पार्टी की एक ऐतिहासिक जरूरत बन गई है। कांग्रेस और टीआरएस के इस महान गठबंधन‌ को ‘सार्वजनिक गठबंधन’ का नाम दिया गया है। पार्टी के दिग्गज नेताओं के द्वारा उम्मीद लगाई जा रही है कि यह सार्वजनिक गठबंधन की कामयाबी से देश‌ की राजनीति में बदलाव आएगा। देश की राजनीति में बदलाव आएगा या नहीं पता नहीं, राज्य में चार पार्टियों के गठबंधन के बाद यह वह मौका है जब कांग्रेस टीडीपी के साथ आई है।

अब सबसे बड़ा प्रश्न यह है कि इस गठबंधन से कांग्रेस को फायदा होगा या नुकसान। इस सवाल के उत्तर में अगर कुछ सामने आता है तो वह है, तेलंगाना में विपक्षी दलों के बीच गठबंधन करके केसीआर के खिलाफ सत्ता विरोधी लहर को बढ़ावा देना। लेकिन सवाल ये भी है कि क्या ये ‘नई दोस्ती’ तेलंगाना के लोगों का दिल जीतने में कामयाब हो पाएगी? दरअसल पिछले चुनाव में केसीआर को मजबूत तेलंगाना की भावना का लाभ मिला था। साढ़े चार साल तक सत्ता में रहने के बाद उनके खिलाफ सत्ता विरोधी लहर तो जरुर है लेकिन राज्य में आज भी उनके जितना प्रभावशाली नेता दूसरा नहीं है। ऐसा नहीं है कि चंद्रबाबू नायडू की राज्य में पकड़ नहीं है उनका तो तेलंगाना से एक दशक पुराना नाता है लेकिन यह राजनीति है इसमें कब क्या हो जाए कुछ भी नहीं कहा जा सकता। अब कांग्रेस और टीडीपी को ही देख लीजिए जो कल तक आमने-सामने थे आज वह साथ हैं।

अब सवाल यह उठ रहा है कि क्या कांग्रेस का टीडीपी से गठबंधन करने का फैसला सही है? राजनीतिक विश्लेषक इस बात पर अपनी राय रखते हुए कहते हैं कि, गठबंधन ने निश्चित तौर पर राज्य में कांग्रेस की स्थिति को मजबूत किया है। यदि यह काम करता है तो राज्य में यह पार्टी के लिए बूस्ट की तरह काम करेगा” इसके अलावा आंध्रप्रदेश के क्षेत्रों की एक बड़ी आबादी हैदराबाद में रहती है, नायडू या टीडीपी के लिए उनका समर्थन अप्रत्यक्ष रूप से कांग्रेस के लिए समर्थन होगा। जैसे हर सिक्के के दो पहलू होते हैं वैसे ही इस गठबंधन पर अनुकूल राजनीति के विपरीत प्रभाव भी पड़ सकते हैं जो तेलंगाना में गठबंधन की सरकार बनाने में रोड़ा डाल सकते हैं क्योंकि भाजपा भी अपने दिग्गज नेताओं के सहारे तेलंगाना में अपनी सरकार बनाने की रणनीति तैयार कर रही है।    

हालाँकि इस बारे में कुछ भी कहना जल्दबाजी होगी क्योंकि परिणाम से पहले उसके नतीजों के बारें में कुछ भी नहीं कहा जा सकता। तेलंगाना में गठबंधन को मिली जीत कांग्रेस को राष्ट्रीय स्तर पर एक मजबूत संदेश देगी।

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