Track your constituency

Home » Political-Corner  » क्या प्रियंका गांधी बचा पाएंगी कांग्रेस की 70 सालों की सियासत?

क्या प्रियंका गांधी बचा पाएंगी कांग्रेस की 70 सालों की सियासत?

Posted by Admin on January 28, 2019 | Comment

क्या प्रियंका गांधी बचा पाएंगी कांग्रेस की 70 सालों की सियासत? 4.88/5 (97.50%) 8 votes

Priyanka  Gandhi

कांग्रेस ने लोकसभा चुनाव के लिए आखिरकार प्रियंका गांधी के नाम पर तुरूप का इक्का चल दिया है। लंबे समय से कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मांग थी कि प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारा जाए वो अब पूरी हो चुकी है। इससे पहले प्रियंका गांधी की राजनीति सिर्फ उनके घरेलू क्षेत्र अमेठी और रायबरेली तक ही सीमित रही है। हालांकि अब प्रियंका गांधी के कांग्रेस महासचिव बन जाने के बाद उनका राजनीतिक ग्राफ काफी बढ़ गया है इसके अलावा उन्हें पूर्वी यूपी की कमान भी सौंपी गई है। आपको बता दें कि कांग्रेस की नई नवेली महासचिव बनी प्रियंका गांधी के ऊपर पूर्वी यूपी की लगभग 30 सीटों को जीताने की जिम्मेदारी है। गांधी परिवार में जन्म लेने के बावजूद खुद को सक्रिय राजनीति से दूर रखने वाली प्रियंका गांधी वाड्रा अब फुल टाइम पॉलिटिक्स में आ गई हैं। लोकसभा चुनाव में प्रियंका गांधी अपने भाई राहुल गांधी के लिए कितनी मददगार साबित होंगी यह तो आने वाला वक्त ही बताएगा। फिलहाल प्रियंका की एंट्री कांग्रेस कार्यकर्ताओ में जोश लाने के लिए काफी मददगार साबित हुई है।

प्रियंका नहीं ये आंधी है दूसरी इंदिरा गांधी है

प्रियंका के राजनीति में आने से कांग्रेस कार्यकर्ताओं में एक नया जोश देखने को मिल रहा है यह जोश चुनाव तक बना रहे तो पार्टी के लिए अच्छा है। प्रियंका गांधी के राजनीति में आने पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक नया स्लोगन दिया है कि, “प्रियंका नहीं ये आंधी है दूसरी इंदिरा गांधी है”। मतलब साफ है कि प्रियंका गांधी में लोगों को दूसरी इंदिरा गांधी नजर आ रही हैं। ऐसे में प्रियंका गांधी पर यूपी में कांग्रेस के अस्तित्व को बचाने से लेकर, इंदिरा जैसी मजबूत छवि वाली नेता बनने का सफर तय करना होगा। कांग्रेस की 70 सालों की सियासत को बचाने के लिए और इंदिरा गांधी जैसी सशक्त नेता बनने के लिए प्रियंका गांधी को कई प्रकार की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। इसके अलावा भाई-बहन की इस जोड़ी को यूपी में बुआ-बबुआ की रणनीति का भी सामना करना पड़ेगा।

फ्रंटफुट पर खेलने की तैयारी में कांग्रेस

कांग्रेस 2019 के लोकसभा चुनाव में अपना बेहतर प्रर्दशन करने के लिए कई प्रकार की रणनीतियों पर काम रही है। 2014 के लोकसभा चुनाव में जिस प्रकार का प्रर्दशन कांग्रेस ने किया उससे वह बैकफुट पर चली गई थी। 2017 में यूपी विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को जो हार मिली उससे तो राज्य में कांग्रेस का अस्तित्व ही खतरे में पड़ गया था। 2018 के विधानसभा चुनाव में तीन राज्यों में मिली जीत से कांग्रेस के अस्तित्व को लेकर जो काले बदले छाए हुए थे वो काफी हद तक कम हो गए। एक समय में पूरे देश पर राज करने वाली कांग्रेस अब धीरे-धीरे फिर से प्रंटफुट पर खेलने की तैयारी कर रही है।  

प्रियंका गांधी के आने से पूर्वी यूपी में किस पर पड़ेगा कितना असर

प्रियंका गांधी के राजनीति में आते ही आखिर उन्हें पूर्वी यूपी की ही कमान क्यों सौपी गई? क्या यूपी में प्रियंका का असर देखने को मिलेगा, किस समुदाय पर असर डालेगी प्रियंका। ऐसे कई प्रश्न हैं जो आजकल राजनीति के गलियारों में घूम रहे हैं। पूर्वी यूपी के सवर्ण वोटरों पर भाजपा की अच्छी पकड़ है साथ ही दलित और मुस्लिम समुदाय हमेशा से सपा-बसपा के साथ खड़ा नजर आता है। इसके अलावा कई और भी समुदाय हैं जिन पर सभी पार्टियों की मिली-जुली पकड़ है। ऐसे में अगर प्रियंका पूर्वी यूपी की 30 सीटों पर अपना प्रभाव डाल पाती हैं तो कांग्रेस यूपी में भाजपा के बराबर में देखी जा सकती हैं क्योंकि इस बार सपा-बसपा के साथ आ जाने से भाजपा की लोकसभा चुनाव में कम सीटों पर जीत मिलने के आसार हैं।

2014 में मोदी की लहर के फलस्वरूप यूपी के अधिकत्तर युवा व सवर्ण भाजपा में गए तो कुछ क्षेत्रीय दलों के जबर्दस्त उभार के कारण सपा-बसपा में चले गए। कांग्रेस के इस पहल से उनकी वापसी हो सकती है। युवाओं में प्रियंका का काफी क्रेज़ रहा है, लेकिन सक्रिय राजनीति में नहीं आने से निराश युवा अब उनकी वापसी पर कांग्रेस की ओर अपना रुख कर सकते हैं। कांग्रेस की इस रणनीति के पीछे के कारणों को समझा जा सकता है। इसके अलावा यूपी में अभी तक कांग्रेस के पास कोई ऐसा युवा चेहरा नहीं था जिसके दम पर वह युवाओं को अपने साथ खड़ा कर सके। ऐसे में 80 लोकसभा सीटों वाले उत्तरप्रदेश में कांग्रेस के गिरते ग्राफ को ऊपर उठाने और एक बार फिर पुराने जनाधार को वापस लाने की जिम्मेदारी प्रियंका गांधी के कंधों पर है। कांग्रेस को भरोसा है कि प्रियंका गांधी की करिश्माई छवि, महिलाओं और युवाओं में उनकी लोकप्रियता के दम पर पार्टी एक बार फिर से यूपी में महासमर के दौरान अपने-आप को खड़ा कर पाएगी।

कांग्रेस के लिए यूपी कितनी जरूरी ? 

प्रियंका गांधी को यूपी की कमान सौंपना कांग्रेस की एक सोची समझी रणनीति है। लोकसभा चुनाव के मद्देनजर यूपी की लोकसभा सीटें कांग्रेस के लिए बेहद जरूरी हैं, क्योंकि 2019 में अगर गैर भाजपाई दल केंद्र में सरकार बनाने की स्थिति में आते भी हैं तो बिना यूपी में बड़ी सफलता के कांग्रेस की स्थिति कमजोर हो सकती है। ऐसे में अन्य दल तीसरा मोर्चा, सपा-बसपा गठबंधन कांग्रेस के खिलाफ जा सकते हैं, पर अगर कांग्रेस की नई तारनहार प्रियंका गांधी यूपी में अच्छा प्रर्दशन करती हैं तो गैर- भाजपाई और गैर-कांग्रेसी गठबंधन की भावी सरकार को बाहर से या अंदर से समर्थन देने पर मजबूर हो जाएंगे। फिलहाल कांग्रेस सत्ता में आने के लिए सभी प्रकार के रास्ते अपना रही है। पर सवाल अब भी वही है कि क्या, वर्तमान में पार्टी की जीवनरेखा मानी जाने वाली प्रियंका गांधी कांग्रेस की 70 सालों की सियासत को बचाने में सफल हो पाएंगी या नहीं?   

Pin It

<