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ममता बनर्जी बनाम केन्द्र, सियासत के लिए दांव पर लोकतंत्र

Posted by Admin on February 4, 2019 | Comment

ममता बनर्जी बनाम केन्द्र, सियासत के लिए दांव पर लोकतंत्र 5.00/5 (100.00%) 2 votes

Mamata versus Center

जब राज्य की मुखिया ही लोकतन्त्र को दांव पर रखकर सड़क पर प्रर्दशन करने लगे तो वहां की जनता क्या करेगी? आजकल पश्चिम बंगाल के सियासी पैतरे हर मिनट में बदलते हुए नजर आ रहे है। मौजूदा समय में नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल की ममता बनर्जी सरकार आमने-सामने है। कारण चाहे कुछ भी लेकिन देश में जिन नेताओं के ऊपर संविधान की रक्षा और लोकतंन्र को बचाने की जिम्मेदारी हो वही सड़क पर उतरकर प्रदर्शन करने लगे वो भी एक ऐसे व्यक्ति के लिए जो भष्टाचार का आरोपी हो, तो हमारा देश किस तरफ जा रहा है ये बताने की जरूरत नहीं है। इस बात को आगे बढ़ाने से पहले आपको इस पूरे प्रकरण के बारे में अवगत कराना जरूरी है।

क्या है पूरा मामला?

आपको बता दें कि शारदा चिटफंड देश के चर्चित मामलों में से एक है। इसमें 40 हजार करोड़ रुपये का घोटाला हुआ था। कोलकाता पुलिस के कमिश्नर राजीव कुमार ने इस मामले में बनी एसआईटी की अगुवाई की थी। सीबीआई का कहना है कि मामले से जुड़े कुछ जरूरी दस्तावेज इनके पास हैं। इसके लिए कल (रविवार) सीबीआई के अधिकारी पुलिस के कमिश्नर राजीव कुमार के घर पहुँची। जहाँ सीबीआई के पाँच अधिकारियों को कोलकाता पुलिस ने हिरासत में ले लिया। इस पर ममता बनर्जी ने आरोप लगाया कि सीबीआई की टीम बिना किसी सर्च वारंट के राजीव कुमार के घर पहुंची और घर में घुसने की कोशिश की। हालांकि, सीबीआई का तर्क था कि वह जरूरी कागजों के साथ वहां पर पहुंची थी लेकिन उन्हें कोई कार्रवाई नहीं करने दी गई। इस मामले को देखकर लगता है कि इसे साधारण तरीके से भी निपटाया जा सकता था, लेकिन फिर इस पर राजनीति कैसे हो पाती, वो भी तो जरूरी थी। राज्य सरकार का इस तरीके से किसी भष्टचार के आरोपी को बचाने के लिए सड़क पर प्रर्दशन करना कहा तक सही है। हालांकि ममता की राजनीति में खूब नाटकीयता रही है। अटल बिहारी सरकार के जमाने में मंत्री होते हुए भी ममता संसद के गर्भ गृह में जा कर बैठ गईं थी। नाटक करना तो राजनेताओं का अधिकार है पर अधिकारों की भी अपनी एक सीमा होती है।

सीबीआई तो बहाना असली मकसद मोदी को हटाना

भले ही यह पूरा मामला सीबीआई और पुलिस कमिश्नर राजीव कुमार के बीच का है लेकिन इसमें साफ तौर पर सियासत नजर आ रही है। आए भी क्यो न लोकसभा चुनाव नजदीक है। ऐसे में ममता बनर्जी पश्चिम बंगाल की सियासत में अपनी विपक्षी पार्टी भाजपा के बढ़ते ग्राफ और मोदी की बढ़ती लोकप्रियता से काफी चिंतित है। कही न कही ममता बनर्जी को पश्चिम बंगाल में अपनी सियासी जमीन खिसकती हुई नजर आ रही है। राज्य में सीबीआई के खिलाफ प्रदर्शन करना तो ममता बनर्जी का बहाना है उनका असली मकसद मोदी को हटाना है। केन्द्र और मोदी के खिलाफ ममता का आक्रामक रवैया देखकर लगता है कि वह सभी पार्टियों और पश्चिम बंगाल की जनता की सहानभूति पाना चाहती है। ममता बनर्जी ने धरने पर बैठते ही नारा दिया कि मोदी हटाओ देश बचाओं  मतलब साफ है कि ममता का मकसद सिर्फ दिल्ली की कुर्सी पाना है। इसके लिए सड़क पर प्रर्दशन करना, सीबीआई को हिरासत में लेना, भाजपा नेताओं की रैलियों के लिए अनुमति न देना, सड़क पर बैठकर बजट सत्र को फोन पर संबोधित करना, ये सब करने से उन्हें कोई परहेज नहीं है।    

सियासत के लिए सड़क पर लोकतंत्र

ममता बनर्जी और केंद्र सरकार के बीच की लड़ाई अब अपने चरम पर है पर इन सबके बीच पीस रहा है देश का लोकतन्त्र। क्योकि जिसके हाथों में राज्य की सत्ता हो और वो ही सड़क पर प्रर्दशन करने लगे तो इससे बुरा और क्या होगा। पश्चिम बंगाल की यह लड़ाई सीधे तौर पर मोदी और ममता के बीच दिख रही है। सियासी नजर से देखे तो ममता तीसरे मोर्चे के जरिए दिल्ली जाने का रास्ता तय करना चाह रही हैं तो मोदी भी इस बार बंगाल के रास्ते दोबारा से दिल्ली की सत्ता पर काबिज होना चाह रहे हैं क्योंकि पिछली बार 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने जिस प्रकार से देश के सबसे बड़े राज्य यूपी से लोकसभा की 80 सीटों पर जीत हासिल की थी। अब वहां के हालात कुछ और है क्योंकि यूपी में इस बार 2019 के लोकसभा चुनाव में सपा-बसपा गठबंधन करके चुनाव लड़ रही है ऊपर से कांग्रेस ने भी प्रियंका गांधी को सक्रिय राजनीति में उतारकर पश्चिमी यूपी की कमान सौंप दी है। ऐसे स्थिति में भाजपा को यूपी में सिर्फ 30 से 35 सीटें मिलने के अनुमान लगाए जा रहे हैं। इसके अलावा भाजपा के अधिकांश विपक्षी दल गठबंधन के साथ खड़े है ऐसे में भाजपा यूपी में होने वाले अपने नुकसान की भरपाई पश्चिम बंगाल से करना चाह रही हैं। इधर ममता बनर्जी अपने ही राज्य में भाजपा के बढ़ते कदम से काफी चिंतित है क्योंकि ममता बनर्जी तीसरे मोर्चे के जरिए प्रधानमंत्री पद के लिए सपने सजा रही हैं। कुल मिलाकर पश्चिम बंगाल में इस समय जो माहौल बना हुआ है वो पूरी तरह से चुनावी है। भले ही इसका टाइटल सीबीआई बनाम पुलिस है लेकिन अन्दर की पूरी कहानी मोदी बनाम ममता ही है।  

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