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क्या छत्तीसगढ़ में अच्छे प्रदर्शन से मध्यप्रदेश में भाजपा का रास्ता होगा आसान?

Posted by Admin on November 22, 2018 | Comment

क्या छत्तीसगढ़ में अच्छे प्रदर्शन से मध्यप्रदेश में भाजपा का रास्ता होगा आसान? 3.00/5 (60.00%) 2 votes

मध्यप्रदेश; मैदान संभालेंगे आरएसएस कार्यकर्ता-Monika

मध्यप्रदेश विधानसभा चुनाव -  छत्तीसगढ़ में मतदान समाप्त हो गया है। हर तरीके से, राज्य में भाजपा बहुमत प्राप्त करते हुए दिख रही है। भाजपा के 15 साल से सत्ता में होने के बावजूद ऐसा प्रदर्शन बहुत ही सराहनीय है।

पहले चरण में बस्तर और राजनंदगांव के नक्सल प्रभावित क्षेत्रों को कवर किया गया, जिसमें सुकमा, दंतेवाड़ा और नारायणपुर जैसे अत्याधिक नक्सल प्रभावित जिले शामिल थे और यहां भाजपा का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा। 18 निर्वाचन क्षेत्रों के इस चरण में, भाजपा को 2013 में केवल 6 सीटें प्राप्त हुईं थी। नक्सलियों के खतरे के बाद भी इस क्षेत्र में इस बार अच्छी वोटिंग हुई। भले ही उन्होंने नुकसान पहुचाने की पूरी कोशिश की, लेकिन फिर भी नक्सली बढ़-चढ़ कर हुए मतदान को रोक नहीं पाए। इस कार्य के लिए सरकार प्रशंसा की पात्र है।

पहले चरण में, हमारे ओपिनियन पोल के अनुसार ऐसा लगता है कि भाजपा आराम से 18 सीटों में से 12 सीटें प्राप्त करेगी। 72 निर्वाचन क्षेत्रों के दूसरे चरण में भाजपा को पिछली बार 43 सीटें प्राप्त हुईं थी। यह वह क्षेत्र है जहां अजीत जोगी और बसपा की स्थिति भी मजबूत है। दूसरे चरण में 72 प्रतिशत से अधिक मतदान होने के बाद ऐसा लग रहा है कि छत्तीसगढ़ के लिए Electoins.in का ओपिनियन पोल सर्वेक्षण सही साबित होगा।

अब बड़ा सवाल यह है कि यह परिणाम मध्यप्रदेश के परिणामों को कैसे प्रभावित करेगा। ऐतिहासिक रूप से, छत्तीसगढ़ के सीमावर्ती मध्यप्रदेश के विंध्य (30 सीटें) और महाकौशल (38 सीटें) में लगभग समान रूप से ही मतदान होता है। हमारे ओपिनियन पोल के अनुसार भाजपा को 130 सीटें और कांग्रेस को 80 सीटें मिल सकती हैं। छिंदवाड़ा कमल नाथ का गढ़ है, लेकिन छिंदवाड़ा के अलावा, महाकौशल के सभी अन्य जिले – कटनी, जबलपुर, मंडला, सिवनी और बालाघाट भाजपा के पलड़े में जाते दिख रहे हैं। चंबल क्षेत्र (34 सीटें) हमेशा से भाजपा के लिए एक संघर्ष भरा क्षेत्र रहा है। ग्वालियर, भिंड और मुरैना को छोड़कर, अन्य सभी जिले – दतिया, शिवपुरी, गुना और श्योपुर कांग्रेस के गढ़ हैं। मालवा (50 सीटें), मध्य भारत (36 सीटें), और निमाद (16 सीटें) हमेशा भाजपा का गढ़ रहे हैं। रतलाम और झाबुआ में, भाजपा कुछ सीटें खोने के लिए तैयार है, लेकिन मंदसौर और नीमच, राहुल के नेतृत्व में हुए किसान आंदोलन के बावजूद, पक्ष में दिख रहे हैं। भोपाल के आस-पास का क्षेत्र यानी मध्य भारत में ऐसा नहीं लग रहा है कि कांग्रेस यहां कुछ ज्यादा कर पाएगी। हालांकि, हम बसपा और अन्य को बहुत प्रभाव डालते हुए नहीं देख रहे हैं। इसलिए कांग्रेस चुनाव में हमारे ओपिनियन पोल के मुकाबले लगभग 10 और सीटें जीत सकती है।

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