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विवादित निर्वाचन क्षेत्र- सेरछिप



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मिजो नेशनल फ्रंट सेरछिप में कांग्रेस को कड़ी टक्कर देगी

मिजोरम की सेरछिप विधानसभा में, 1998 से कांग्रेस और मिजो नेशनल फ्रंट (एमएनएफ) दो सबसे बड़ी प्रतियोगी पार्टी हैं। कांग्रेस 2003 से पहले से सेरछिप निर्वाचन क्षेत्र में चुनाव जीतती आई है लेकिन 2018 में कांग्रेस के लिए यहाँ से जीतना आसान नहीं हो सकता है। सेरछिप निर्वाचन क्षेत्र में 2018 का चुनाव कांग्रेस को हराकर एमएनएफ पार्टी जीत सकती है।

विधायक ललथनहवला यहां के लोकप्रिय नेता हैं जिन्होंने 1984 से छह बार यह सीट जीती है, लेकिन 1998 में एक बार हार गए थे जब एक सेवानिवृत्त पीडब्ल्यूडी प्रमुख के. थांगजुआला (मिजो नेशनल फ्रंट) ने उन्हें 696 मतों से हराया था। 2013 में, कांग्रेस के ललथनहवला ने अपने बराबरी एमएनएफ प्रतिद्वंद्वी ललरामजौवा को 734 वोटों के अंतर से हराकर यहाँ सीट जीती थी, जिन्हें कुल मिलाकर उन्हें 4,985 वोट मिले थे। इस चुनाव में थनहवला को 5719 वोट प्राप्त हुए थे। इस साल, कांग्रेस की तुलना में एमएनएफ पार्टी की लोकप्रियता में तेज वृद्धि देखी गई है क्योंकि एमएनएफ के वोट बैंक में लगभग 50% की वृद्धि हुई जबकि कांग्रेस के वोट बैंक में केवल 20% की वृद्धि हुई।

एमएनएफ की 27.37% वोट के साथ 2008 के चुनावों में तेजी से गिरावट दर्ज की गई थी और फेहरिस्त में तीसरे स्थान पर थी। इस पार्टी के उम्मीदवार आर. लाल्हुना को 3338 वोट मिले। इस वर्ष कांग्रेस उम्मीदवार थनहवला ने जेडएनपी के उम्मीदवार सी. ललरामजौवा को 952 वोट के अंतर से हराकर 4937 वोट हासिल किए थे। ललरामजौवा को 3792 वोट मिले।

 2003 में, थनहवला ने एक बार फिर चुनाव जीत लिया और 927 मतों के अंतर से भारतीय उम्मीदवार जे सावलिया को परस्त किया था। कांग्रेस में 26.5 9% वोट वृद्धि इस साल दर्ज की गई थी। इस साल एमएनएफ पार्टी ने सेरछिप से चुनाव नहीं लड़ा था और इस वजह से 2008 के चुनावों में सेरछिप निर्वाचन क्षेत्र में लोकप्रियता बहुत ज्यादा घट गई थी, यही कारण है कि यह जेएनएनपी पार्टी की लोकप्रियता बढ़ गई और इसे सूची में तीसरा स्थान मिला। 2003 से सेरछिप सीट कांग्रेस जीतती आई है और तब से यह विजेता बनी हुई है।

थनहवला इस क्षेत्र के लोकप्रिय नेता हैं क्योंकि उन्होंने इंदिरा आवास योजना और मनेरगा से लेकर राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतिकरण योजना जैसे कुछ जबरदस्त कार्य करके सेरछिप क्षेत्र का चेहरा ही बदल दिया जिसे कभी पिछड़ा क्षेत्र के रूप में जाना जाता था। कांग्रेस ने 2013 के चुनाव में पहली बार गिरावट देखी जबकि 2003 और 2008 में जीत का मार्जिन बढ़ा हुआ था। यह कांग्रेस के लिए अच्छे संकेत नहीं है और संभावना है कि एमएनएफ पार्टी 2018 चुनाव विजेता हो सकती है।

Last Updated on October 29, 2018