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राजनंदगांव में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा संघर्ष


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Bathinda, the way for Harsimrat Kaur will not be as easy as 2014 this time बठिंडा लोकसभा सीट: इस बार 2014 की तरह आसान नहीं होगी हरसिमरत कौर की राह

लोकसभा चुनाव 2019 में पंजाब की बठिंडा लोकसभा सीट पर इस बार कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है। 2014 में अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने यहां से आगे पढ़ें…

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पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर मंगलवार को भारत की ओर से की गई एयर स्ट्राइक में भाजपा को सियासी फायदा नजर आ रहा है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश आगे पढ़ें…



छत्तीसगढ़ के सेहोर जिले के राजनंदगांव निर्वाचन क्षेत्र में भाजपा पिछले दो कार्यकाल से सत्ता में है। ऐसा कहा जाता है कि छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह की जनता के बीच अच्छी छवि है। हालांकि भाजपा इस क्षेत्र में सत्ता में है, लेकिन इस बार कांग्रेस की भी अच्छा प्रदर्शन करने की संभावना है।

देखना ये है कि कौन सी परिस्थितियां डॉ. रमन सिंह को इस निर्वाचन क्षेत्र में जीत हासिल करने से वंचित कर सकती हैं। डॉ. रमन सिंह ने क्षेत्र में अनुकरणीय कार्य किए हैं। यदि हम यह कहें कि क्षेत्र में पिछले 15 वर्षों में किए गए विकास इस राजनेता के कारण हैं, तो यह गलत नहीं होगा। डॉ. सिंह को उनकी संगठनात्मक क्षमताओं के लिए प्रशंसा प्राप्त हुई है, जैसा कि एससी और एसटी की स्थिति में सुधार के लिए कार्यक्रमों के कार्यान्वयन के संबंध में उनके राज्य की स्थिति से प्रतिबिंबित होता है। आपको बता दें कि उनके नेतृत्व के अंतर्गत छत्तीसगढ़ में किए गए कार्यों और राज्य के वित्तीय प्रबंधन को संयुक्त राष्ट्र ने भी सराहा है। इसके अलावा उनके द्वारा क्षेत्र में कृषि, शिक्षा, आदिवासी क्षेत्रों, महिलाओं, बच्चों, किसानों और युवाओं के विकास पर भी विशेष जोर दिया गया था। हालांकि विपक्षी दल आरोप लगाते हैं कि युवा अभी भी नौकरियां पाने के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

वर्ष 2013 के चुनाव में, राजनांदगांव में सत्तारूढ़ भाजपा और विपक्षी दल कांग्रेस के बीच एक कड़ी प्रतिस्पर्धा देखी गई थी। 90 सीटों में से भाजपा ने 49 सीटें जीती थीं जबकि 39 सीटें कांग्रेस पार्टी ने जीती थीं। बाकी दो सीटें में से एक बसपा और एक निर्दलीय उम्मीदवार ने जीती थीं। रमन सिंह ने कांग्रेस की अल्का मुडलियार को 35,866 मतों के अंतर से हराकर राजनंदगांव विधानसभा क्षेत्र जीता था। रमन सिंह को 86,797 मत प्राप्त हुए जबकि अल्का 50,931 मत प्राप्त कर सकीं। वर्ष 2008 में डॉ. सिंह ने कांग्रेस उम्मीदवार उदय मुडलियार को 32389 मतों के अंतर से हराकर 77230 वोटों के साथ जीत हासिल की। मुडलियार को 44841 मत ही प्राप्त हो सके।

हालांकि भाजपा के हिंदूवाद ने इस क्षेत्र और छत्तीसगढ़ में गहरी पैठ बनाई है, लेकिन एससी-एसटी कानून द्वारा उत्पन्न पीड़ा भाजपा को नुकसान पहुँचा सकती है और साथ ही डॉ. रमन सिंह पर भी कुछ हद तक इसका प्रभाव पड़ सकता है। इस क्षेत्र में कांग्रेस के भी अच्छे प्रदर्शन की संभावना है। राजनंदगांव जिले में लगभग 1537133 जनसंख्या के साथ 75.96% की अच्छी साक्षरता दर है, इसलिए सामान्य मुद्दों पर जनता के फैसले में हेरफेर करना मुश्किल होगा।

वर्ष 2003 में कांग्रेस उम्मीदवार उदय मुडलियार ने भाजपा उम्मीदवार लीलाराम भोजवानी को हराकर महज 40 मतों के अंतर से सीट जीती। इसलिए, कोई आश्चर्य की बात नहीं यदि इस बार भी कांग्रेस सत्ता में लौट सकती है।

Last Updated on October 29, 2018