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झालरापाटनः वसुंधरा के लिए हाँ, भाजपा के लिए ना!


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The attack of the opposition on BJP's program, Politics in a war-like situation भाजपा के कार्यक्रम पर विपक्ष का निशाना, युद्ध जैसी स्थिति में कर रही राजनीति

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Bathinda, the way for Harsimrat Kaur will not be as easy as 2014 this time बठिंडा लोकसभा सीट: इस बार 2014 की तरह आसान नहीं होगी हरसिमरत कौर की राह

लोकसभा चुनाव 2019 में पंजाब की बठिंडा लोकसभा सीट पर इस बार कड़ी टक्कर होने की उम्मीद है। 2014 में अकाली दल की नेता हरसिमरत कौर बादल ने यहां से आगे पढ़ें…

Yeddyurappa said BJP will win 22 Lok Sabha seats in Karnataka येदियुरप्पा को भरोसा, एयर स्ट्राइक से भाजपा कर्नाटक में जीतेगी 22 सीटें

पाकिस्तान के आतंकी ठिकानों पर मंगलवार को भारत की ओर से की गई एयर स्ट्राइक में भाजपा को सियासी फायदा नजर आ रहा है। कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री और प्रदेश आगे पढ़ें…



राजस्थान में झालावाड़ क्षेत्र की झालरापाटन निर्वाचन सीट पर भाजपा ने वर्षों से शासन किया है। राजस्थान की मुख्यमंत्री, वसुंधरा राजे झालरापाटन निर्वाचन क्षेत्र की विधायक हैं जो लगातार तीसरी बार इसका प्रतिनिधित्व कर रही हैं। वर्ष 2003 में, वह राज्य की पहली महिला मुख्यमंत्री बनी थी, इस सीट को भाजपा गढ़ या उपयुक्त रूप से वसुंधरा का गढ़ कहा जा सकता है।

पिछले कुछ दशकों से झालरापाटन निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस और बीजेपी दोनों का शासन देखा गया था। पिछले तीन दशकों में, इस विधानसभा का नेतृत्व भाजपा और कांग्रेस के अलावा किसी अन्य पार्टी को शायद ही कभी करने का मौका मिला हो। चूँकि वसुंधरा 2003 से सत्ता में रही है, इसलिए यह सीट वह लगातार जीतती रही है। इससे पहले, 1998 में झालरापाटन निर्वाचन क्षेत्र पर भाजपा से यह सीट कांग्रेस पार्टी के मोहनलाल ने हासिल की थी, जो 1990 से 1998 तक सत्ता में थी और इस निर्वाचन क्षेत्र की सेवा अनांग कुमार ने की थी। इस क्षेत्र में पुरुष आबादी का 52% है जबकि महिला संख्या में 48% है। महिला मतदाताओं का एक अच्छा प्रतिशत निश्चित रूप से पासा पलटने की शक्ति रखता है। 2011 की जनगणना के अनुसार, यहां की जनसंख्या 391746 है जिसका 70.07 प्रतिशत हिस्सा ग्रामीण और 29.93 प्रतिशत हिस्सा शहरी है। इसी समय, कुल आबादी का 17.67 प्रतिशत अनुसूचित जाति और 8.5 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति हैं।

2013 में, वसुंधरा राजे ने कांग्रेस की मीनाक्षी चंद्रवत से अधिक वोट हासिल करके यह सीट जीती थी। यद्यपि मीनाक्षी भी हरिगढ़ के शाही परिवार से है लेकिन वसुंधरा लहर के समाने टिक न सकीं। राजे ने 60896 वोटों के व्यापक अंतर से यह सीट जीती। वसुंधरा को 114384 वोट मिले जबकि मीनाक्षी ने 53488 वोट ही प्राप्त हुए। इस चुनाव में, नोटा (उपरोक्त में से कोई नहीं) एक बड़े खिलाड़ी के रूप में उभरा है जिसने 3723 मतों को विफल करके तीसरा नंबर हासिल किया था।

इस निर्वाचन क्षेत्र में वसुंधरा राजे की मजबूत पकड़ है और लगातार तीन बार चुनी गई है। इस समय, एक आश्चर्य हो सकता है कि वसुंधरा के लिए भाजपा की पारंपरिक सीट को वापस पाने के लिए जिम्मेदार कारक क्या हो सकते हैं। यहाँ पर कुछ बिंदुओं का उल्लेख किया जाना चाहिए, पहला मध्य प्रदेश की सीमा पर स्थित निर्वाचन क्षेत्र में ग्वालियर शाही परिवार का गढ़ है। इसके अलावा, इस निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस के समय हुए नुकसान ने भी वसुंधरा को लाभान्वित किया, तीसरा इस निर्वाचन क्षेत्र में महिला मतदाता काफी अधिक है जिससे राजे को कुछ हद तक समर्थन मिल सकता है।

संभावना है कि इस बार भी वसुंधरा राजे इस सीट पर कब्जा कर सकती है। लेकिन इस चुनाव में, कोई भी भविष्यवाणी नहीं जा सकती है। चूंकि अभी तक मोदी सरकार सत्ता में है लेकिन चुनाव विश्लेषण से पता चलता है कि यहाँ पर मोदी लहर ने अपनी शक्ति खो दी है और भाजपा के लिए नामो के नाम पर चुनाव जीतना आसान नहीं होगा।
Last Updated on October 29, 2018